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हरिद्वार : अमित शाह का दौरा, कुंभ की तैयारी और 2027 का सियासी गणित

उत्तराखंड की आध्यात्मिक नगरी हरिद्वार इस समय केवल गंगा आरती और मंत्रोच्चार के लिए नहीं, बल्कि भारी सियासी हलचल के लिए चर्चा में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 7 मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार दौरा राज्य की राजनीति में एक नए ‘शंखनाद’ के रूप में देखा जा रहा है। बैरागी कैंप का उनका यह भ्रमण कहने को तो धार्मिक और विकास कार्यों की समीक्षा है, लेकिन इसकी परतें राजनीतिक संदेशों से लदी हुई हैं।

मिशन 2027: चुनावी बिसात और ‘धामी 4.0’

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह दौरा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का मंच बनेगा। भाजपा इस मौके को केवल एक सरकारी सालगिरह तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के आगाज़ के रूप में देख रही है।

​अमित शाह की बैठक के मुख्य बिंदु:

​रणनीति पर मंथन: गृह मंत्री प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी के साथ बैठक करेंगे, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जैसे दिग्गज शामिल होंगे।

​कमजोर कड़ियों की मरम्मत: पिछले चुनावों में भाजपा को हरिद्वार ग्रामीण, खानपुर, मंगलौर और पिरान कलियर जैसी सीटों पर कड़ी चुनौती मिली थी। शाह का फोकस इन ‘लाल घेरे’ वाली सीटों पर पकड़ मजबूत करने का होगा।

​विकास की प्रदर्शनी या चुनावी स्टंट?

​भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है कि यह बैठक भविष्य की रणनीति को पुख्ता करेगी, वहीं हरिद्वार विधायक मदन कौशिक इसे विकास के उत्सव से जोड़ते हैं।

​”हमारा उद्देश्य केवल राजनीति नहीं, बल्कि कुंभ की वैश्विक तैयारी का संदेश देना है। चार साल के विकास कार्यों को जनता के सामने रखा जाएगा।”

— मदन कौशिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष (भाजपा)

​दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे ‘पॉलिटिकल स्टंट’ करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता बदलाव का मन बना चुकी है और भाजपा चाहे पूरी केंद्र सरकार उतार दे, भटकाने वाली राजनीति अब नहीं चलेगी।

​हरिद्वार का जटिल समीकरण

​हरिद्वार जिला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। यहाँ की डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) और ग्रामीण-मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भाजपा को हमेशा कड़ी टक्कर मिलती रही है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुनील दत्त पांडे का मानना है कि भाजपा ‘कुंभ’ और ‘चुनाव’ को समानांतर साध रही है। धार्मिक आयोजनों के जरिए हिंदुत्व का कार्ड और विकास कार्यों के जरिए शासन का संदेश देना उनकी पुरानी और सफल रणनीति रही है।

​पीएम मोदी का मेगा शो अभी बाकी है

​अमित शाह का दौरा तो बस शुरुआत है। इसके ठीक बाद 23 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है। यदि यह दौरा होता है, तो मार्च का महीना उत्तराखंड में चुनावी बिगुल के रूप में दर्ज हो जाएगा।

​विश्लेषण: क्या बदलेगी हरिद्वार की हवा?

​हरिद्वार की जिन सीटों पर भाजपा पिछली बार पिछड़ी थी, वहां अमित शाह का दौरा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर सकता है। लेकिन असली चुनौती जनता की उन उम्मीदों पर खरा उतरने की है, जिनके आधार पर विपक्ष ‘बदलाव’ का दावा कर रहा है।

 

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