उत्तराखंडदेहरादून

रेस्टोरेंट से चल रहा था ‘हेड ऑफिस’: औचक छापेमारी में हुआ खुलासा !

बीते शुक्रवार को देहरादून के आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी के नेतृत्व में जब एक टीम कैनाल रोड स्थित रैपिडो के पंजीकृत कार्यालय पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला। जांच में पता चला कि कंपनी ने बिना किसी सूचना के अपना मुख्यालय रिंग रोड स्थित एक पुराने रेस्टोरेंट के कमरे में शिफ्ट कर दिया था। इस गुप्त शिफ्टिंग के कारण विभाग का कंपनी से महीनों से कोई पत्राचार नहीं हो पा रहा था।

रेस्टोरेंट से चल रहा था ‘हेड ऑफिस’: औचक छापेमारी में हुआ खुलासा

अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त:

अवैध वाहन संचालन: कंपनी धड़ल्ले से निजी (सफेद नंबर प्लेट) दोपहिया वाहनों को ऐप पर जोड़कर व्यावसायिक उपयोग कर रही थी। यह मोटर वाहन अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।

सुरक्षा का अभाव: विभाग के पास ऐप पर पंजीकृत वाहनों का कोई सत्यापन (Verification) डेटा नहीं था।

राजस्व की चोरी: कंपनी ने प्रति राइड सरकार को देय 2% राजस्व का भुगतान नहीं किया था। साथ ही, अपनी ‘प्राइसिंग एल्गोरिदम’ (किराया तय करने की प्रणाली) की जानकारी भी साझा नहीं की थी।

भ्रामक सेवाएँ: शिकायतें मिली थीं कि ऐप पर बुकिंग किसी और वाहन की होती थी और मौके पर कोई दूसरा वाहन भेजा जाता है।

आरटीओ संदीप सैनी ने बताया, “कंपनी सरकार के राजस्व  की चोरी कर रही है और यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है। हमने स्टेट ट्रांसपोर्ट अथारिटी (STA) को कंपनी का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की संस्तुति भेज दी है।”

गिग वर्कर्स के हक में बोले राघव चड्ढा: “ये रोबोट नहीं, अर्थव्यवस्था के पहिए हैं”

एक ओर जहां कंपनियां नियमों के उल्लंघन के घेरे में हैं, वहीं इन प्लेटफार्मों पर काम करने वाले ‘गिग वर्कर्स’ की स्थिति पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद से लेकर सड़कों तक इन कर्मियों के अधिकारों की वकालत की है।

हाल ही में दिल्ली में एक डिलीवरी पार्टनर के साथ दिन बिताने के बाद चड्ढा ने कहा, “ये डिलीवरी बॉयज़ और राइडर्स जिन्हें हम ‘गिग वर्कर्स’ कहते हैं, असल में हमारी अर्थव्यवस्था के अदृश्य पहिए हैं। कंपनियां अरबों डॉलर की वैल्यूएशन और यूनिकॉर्न का दर्जा तो हासिल कर रही हैं, लेकिन उनके लिए खून-पसीना बहाने वाले इन युवाओं के पास न सामाजिक सुरक्षा है और न ही सम्मानजनक वेतन।”

उन्होंने 10-मिनट की डिलीवरी प्रणाली को ‘अमानवीय’ करार देते हुए कहा कि ये कंपनियां राइडर्स को डेटा पॉइंट की तरह इस्तेमाल करती हैं। चड्ढा ने मांग की कि कंपनियों को अपनी एल्गोरिदम की आड़ में वर्कर्स का शोषण बंद करना चाहिए और उन्हें बीमा व भविष्य निधि जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।

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