अल्मोड़ाउत्तराखंडनैनीतालहल्द्वानी
Trending

उत्तराखंड में होली का शुभारंभ: आंवला एकादशी पर चीर बंधन,

चार मार्च को मनाया जाएगा होली उत्सव

हल्द्वानी/अल्मोड़ा: उत्तराखंड में होली पर्व का विधिवत आगाज आंवला एकादशी पर चीर बंधन के साथ हो गया। कुमाऊं अंचल में पारंपरिक उल्लास के बीच शुक्रवार को चीर बंधन की रस्म निभाई गई। हल्द्वानी शहर के होली ग्राउंड (सिंधी चौराहा) और पटेल चौक में सुबह नौ बजे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से चीर बांधा।

ज्योतिषाचार्य डॉ. नवीन चंद्र जोशी के अनुसार चीर बंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पारंपरिक रीति से उत्सव की शुरुआत की।

ग्रहण के कारण बदली होली की तिथि

उत्तराखंड में इस वर्ष ग्रहण के चलते होली उत्सव की तिथि में परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः तीन मार्च की प्रदोष बेला में होलिका दहन होना था, लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण शास्त्रीय नियम लागू होंगे।

श्री बुद्धि बल्लभ पंचांग के आचार्य पवन पाठक के अनुसार यदि पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हो तो भद्रा रहित पूर्णिमा में रात्रि के बजाय उपयुक्त मुहूर्त में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना जाता है। ऐसे में तीन मार्च को प्रातः 5:29 बजे से 6:30 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं रंगोत्सव चार मार्च को मनाया जाएगा।

आचार्यों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि सुविधा के बजाय शास्त्रानुसार होलिका दहन करें।

जागेश्वर धाम में चीर बंधन के साथ शुरू हुई खड़ी होली

अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में भी चीर बंधन के साथ पारंपरिक खड़ी होली का शुभारंभ हो गया। देवदार के घने वनों से घिरे इस पावन धाम में स्थानीय श्रद्धालुओं और होल्यारों ने भगवान शिव के मंदिर प्रांगण में चीर बांधकर होली उत्सव की शुरुआत की। ढोल-दमाऊं की थाप और पारंपरिक रागों पर आधारित होली गायन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कत्यूरी काल से जुड़ी परंपरा

इतिहासकारों के अनुसार जागेश्वर क्षेत्र में खड़ी होली की परंपरा कत्यूरी शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है। कुमाऊं में होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहां मंदिर परिसरों में गोल घेरा बनाकर खड़ी होली गाई जाती है, जिसमें शिव और विष्णु स्तुति के साथ राधा-कृष्ण से जुड़े पद भी प्रस्तुत किए जाते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में होली पर्व विशेष आस्था और परंपरा के साथ मनाया जाता है, जो क्षेत्र की समृद्ध लोकसंस्कृति को दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!