”दुखी मन से एकांतवास में था, जल्द लौटूंगा”—पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने तोड़ी चुप्पी, बोले- जांच में करूँगा पूरा सहयोग
ज्वालापुर (हरिद्वार) से पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता सुरेश राठौर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी है। पिछले कुछ दिनों से सार्वजनिक जीवन से दूर चल रहे राठौर ने वीडियो के माध्यम से स्पष्ट किया कि वे किसी भी जांच से भाग नहीं रहे हैं, बल्कि मानसिक तनाव के कारण "एकांतवास" में थे।


हरिद्वार/देहरादून।
वायरल वीडियो और अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े विवादों में घिरे पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश राठौर को नैनीताल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गिरफ्तारी पर रोक (Arrest Stay) का आदेश आते ही पिछले कुछ दिनों से भूमिगत चल रहे राठौर ने सोशल मीडिया पर जोरदार वापसी की है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी और विरोधियों पर जमकर निशाना साधा।
हाईकोर्ट का फैसला आने के तुरंत बाद सुरेश राठौर ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। आत्मविश्वास से भरे अपने संबोधन में उन्होंने कहा:
”सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। मुझे देश की न्यायपालिका और संविधान पर पूर्ण विश्वास था। मेरे खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया था ताकि मेरी छवि को धूमिल किया जा सके। लेकिन झूठ के पैर नहीं होते, आज सच सबके सामने है।”
राठौर ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे कहीं भागे नहीं थे, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि वायरल हुए कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप्स के जरिए उन्हें ब्लैकमेल करने और फंसाने की साजिश रची गई थी, जिसका जवाब अब वे कानूनी तौर पर देंगे।
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती या अगला आदेश नहीं आता, पुलिस राठौर को गिरफ्तार नहीं कर सकती, हालांकि उन्हें जांच में सहयोग करना होगा।
अपने वीडियो संदेश के अंत में राठौर ने इशारों-इशारों में अपने राजनीतिक विरोधियों को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि “जिन लोगों ने मुझे खत्म करने की साजिश रची, उन्हें अब करारा जवाब मिलेगा। मैं अपने क्षेत्र की जनता के साथ खड़ा था और खड़ा रहूँगा।”
फिलहाल, पुलिस की विवेचना जारी है, लेकिन कोर्ट के इस फैसले से सुरेश राठौर को बड़ी संजीवनी मिली है। अब देखना यह होगा कि भाजपा संगठन और पुलिस प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।