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अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने योग की महत्ता पर दिया जोर

ऋषिकेश। ऋषिकेश न केवल चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार है, बल्कि इसे विश्व योग और आध्यात्म की अंतर्राष्ट्रीय राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। इस पवित्र भूमि पर ऋषि-मुनियों ने कठिन साधना कर योग और प्राणायाम के ऐसे सूत्र विकसित किए, जो मानव सभ्यता के लिए वरदान साबित हुए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के समापन अवसर पर शुक्रवार को शीशम झाड़ी, मुनि की रेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड केवल गंगा का ही नहीं, बल्कि योग का भी उद्गम स्थल है। योग और गंगा दोनों ही भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक हैं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि ऋषिकेश सदियों से योग की भूमि रही है। यहां दुनिया भर के संत, महात्मा और योग साधक साधना के लिए आते रहे हैं। उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से इस वर्ष भी 01 मार्च से 07 मार्च तक गंगा तट पर अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन किया गया।

 

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इस आयोजन में देश-विदेश के 410 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिदिन योगाभ्यास किया। महोत्सव में 38 विदेशी योग साधकों ने भी भाग लिया, जो कि स्पेन, कनाडा, इजराइल, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, जापान, रोमानिया, सिंगापुर, अमेरिका, मैक्सिको, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना जैसे विभिन्न देशों से आए थे।

योग महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध योगाचार्यों और योग गुरुओं ने प्रतिभागियों को विभिन्न योग क्रियाओं का प्रशिक्षण दिया। प्रमुख योग प्रशिक्षकों में स्वामी आत्मस्वरूपानंद सरस्वती, योगिनी उषा माता, ग्रैंड मास्टर अक्षर, डॉ. लक्ष्मीनारायण जोशी, योगिनी उर्मिला पांडे, योगी अभिषेक सोती, डॉ. अर्पिता नेगी, कपिल संधी, डॉ. नवदीप जोशी, स्वामी बोद्धी वर्धमान, डॉ. अमित राज, स्वामी जितानंद, योगी जयदेवन और डॉ. विपिन जोशी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इसके अलावा, सांस्कृतिक संध्याओं में प्रेम जोशुआ, ज्योति नूरान, लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, इंदर आर्य, भोजपुरी लोक गायक विमल बावरा और इंडियन ओशन ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। साथ ही, सुप्रसिद्ध कथावाचक सुश्री जया किशोरी जी और लेखक अक्षत गुप्ता भी इस आयोजन के आकर्षण का केंद्र रहे।

मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘फिट इंडिया’ अभियान में योग की अहम भूमिका रही है। आज पूरी दुनिया के लोग बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विज्ञान ने भी यह साबित कर दिया है कि स्वस्थ जीवन के लिए योग और प्राणायाम बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि यह योग महोत्सव विश्वभर में योग को लोकप्रिय बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों से योग को अपने जीवन में शामिल करने और इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने की अपील की।

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का यह आयोजन न केवल ऋषिकेश, बल्कि पूरे उत्तराखंड को योग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ है। योग और आध्यात्म की इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और पर्यटन विभाग निरंतर प्रयासरत हैं, जिससे उत्तराखंड को योग और स्वास्थ्य पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाया जा सके।

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