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ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हमले में मौत की पुष्टि, देश में 40 दिन का राजकीय शोक घोषित

अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है. ईरानी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है. तस्नीम और फार्स न्यूज एजेंसियों ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की. खामेनेई 1989 से ईरान की राजनीति में एक अहम हस्ती थे, उनकी मौत से ईरान में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 86 वर्षीय खामेनेई की मौत के बाद उनके सम्मान में ईरान में 40 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की गई है.

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली अधिकारियों ने दावा किया था कि शनिवार को तेहरान में की गई बमबारी में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है. हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने इन दावों को ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ कहकर मना कर दिया था.

वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़ी न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक, सुप्रीम लीडर खामेनेई की बेटी, दामाद और नाती एक हमले में मारे गए हैं.

खामेनेई कौन थे?

आयतुल्लाह अली हुसैनी खामेनेई का जन्म 1939 को ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ था. वह इराक के एक जाने-माने मुस्लिम लीडर और अजरबैजानी के बेटे थे. उनका परिवार पहले ईरान के तबरीज में बसा, फिर मशहद चला गया, जो धार्मिक तीर्थयात्रियों की पसंदीदा जगह है, जहां खामेनेई के पिता एक मस्जिद की देखरेख करते थे.

खामेनेई ने चार साल की उम्र में कुरान सीखते हुए अपनी पढ़ाई शुरू की, और मशहद के पहले इस्लामिक स्कूल में अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की. उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की, बल्कि धार्मिक शिक्षा देने वाले स्कूलों में गए और अपने पिता और शेख हाशिम गजविनी जैसे उस समय के जाने-माने इस्लामिक विद्वानों से शिक्षा हासिल की. बाद के वर्षों में, उन्होंने नजफ और कोम में उच्च शिक्षा के लिए जाने-माने शिया सेंटरों में अपनी पढ़ाई जारी रखी.

कोम में, उन्होंने कई दूसरे मशहूर मुस्लिम विद्वानों से सीखा और उनसे जुट गए, जिनमें अयातुल्ला खोमैनी भी शामिल थे, जो ईरान के शाह का विरोध करने की वजह से युवा के बीच लोकप्रिय थे.

खामेनेई ने न्यायशास्त्र के कोर्स और पब्लिक थियोलॉजी इंटरप्रिटेशन क्लास सिखाईं, जिससे उन्हें युवा स्टूडेंट्स तक पहुंचने का मौका मिला, जिनका राजशाही से मोहभंग होने लगा था.

उस समय राजशाही, 1953 में MI6 और CIA के करवाए तख्तापलट के बाद पूरी तरह से सत्ता में वापस आ गई थी, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मुसद्दिग को ईरानी तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण करने की कोशिश करने के बाद हटा दिया गया था.

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