Kashi Vidvat : परिषद ने जारी की नई हिंदू आचार संहिता, दहेज और भव्य शादियों पर लगेगा अंकुश

Kashi Vidvat /काशी : हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों पर अंकुश लगाने और परंपराओं को शुद्ध रूप में बनाए रखने के लिए एक नई हिंदू आचार संहिता जारी की है। 400 पन्नों के इस व्यापक दस्तावेज को देश भर के 70 विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के साथ व्यापक चर्चा के बाद तैयार किया गया है। इस संहिता का मुख्य उद्देश्य दहेज प्रथा, शादी-विवाह में फिजूलखर्ची और अनावश्यक धर्मांतरण जैसी समस्याओं का समाधान करना है।
संहिता में दहेज लेने-देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है और शादियों में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विवाह संस्कार को दिन के समय वैदिक पद्धति से करने की सलाह दी गई है तथा प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक प्रथाओं को हतोत्साहित किया गया है। अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज में केवल 13 लोगों को शामिल करने की सीमा निर्धारित की गई है, जिससे अनावश्यक खर्च और दिखावे पर रोक लगेगी।(Kashi Vidvat)
धर्मांतरण के मुद्दे पर संहिता में एक महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। जिन लोगों ने किसी दबाव या लालच में आकर धर्म परिवर्तन किया था, वे अपने मूल गोत्र और नाम के साथ हिंदू धर्म में वापसी कर सकेंगे। इसके लिए एक सरल प्रक्रिया निर्धारित की गई है। मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों के प्रवेश की अनुमति होगी।
काशी विद्वत परिषद के महासचिव राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि यह संहिता 11 मुख्य टीमों और तीन उप-टीमों द्वारा तैयार की गई है, जिसमें उत्तर और दक्षिण भारत के विद्वान शामिल थे। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। इसकी तैयारी में मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति के साथ-साथ गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अंशों को आधार बनाया गया है।(Kashi Vidvat)
संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में वितरित की जाएंगी। अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और प्रमुख संतों की औपचारिक स्वीकृति के बाद इस संहिता को आधिकारिक तौर पर लागू किया जाएगा। यह पहल हिंदू समाज में सामाजिक सुधार और धार्मिक शुद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।