उत्तराखंडरुद्रप्रयाग

Kedarnath:केदारनाथ हाईवे पर अवैध पहाड़ कटाई, प्रशासन की चुप्पी से भड़का जनआक्रोश.

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ नेशनल हाईवे के तिलवाड़ा क्षेत्र में चल रही अवैध पहाड़ कटाई अब आम निर्माण कार्य नहीं रह गई है, बल्कि यह नियमों की खुली अवहेलना, पर्यावरण के साथ खिलवाड़ और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर मामला बन चुकी है। स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी आक्रोश है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासन अब तक चुप्पी साधे हुए है।

केदारनाथ हाईवे पर अवैध पहाड़ कटाई, प्रशासन की चुप्पी से भड़का जनआक्रोश

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक कथित ठेकेदार द्वारा हाईवे किनारे तय मानकों को नजरअंदाज करते हुए बेरोकटोक पहाड़ काटा गया। यह सब राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) विभाग और जिला प्रशासन की मौजूदगी में होता रहा। नियमों के अनुसार हाईवे से सुरक्षित दूरी और पर्यावरणीय बफर जोन का पालन अनिवार्य है, लेकिन तिलवाड़ा क्षेत्र में इन सभी मानकों को ताक पर रख दिया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय स्तर पर नोटिस जारी होने और जुर्माना लगाए जाने के बावजूद कटिंग का काम लगातार जारी रहा। इससे लोगों में यह संदेश गया कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत में नियमों को खुलेआम रौंदा जा रहा है। भारी मशीनों की दिन-रात आवाज से न सिर्फ सड़क की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में भी जोखिम बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल और मलबे के कारण सड़क पर दृश्यता कम हो गई है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही भूस्खलन का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही को लोग सीधे तौर पर जनजीवन से खिलवाड़ मान रहे हैं।

लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि दिसंबर 2025 में तिलवाड़ा और अगस्त्यमुनि बाजार में अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई थी, लेकिन अब उसी प्रशासन की चुप्पी हाईवे किनारे हो रही अवैध पहाड़ कटाई पर कई सवाल खड़े करती है। स्थानीय आरोप है कि जहां अन्य क्षेत्रों में 24 मीटर कटिंग का मानक लागू है, वहीं तिलवाड़ा में अतिरिक्त 14 मीटर तक मनमानी कटाई की गई।

एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने ठेकेदार की एनओसी निरस्त करने और 2 लाख 5 हजार 178 रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि क्या हिमालय जैसे नाजुक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की कीमत सिर्फ इतनी ही है। उनका यह भी सवाल है कि जब नोटिस जारी हो चुका था, तो कटिंग को तत्काल प्रभाव से क्यों नहीं रोका गया।

भरदार विकास मंच से जुड़े भगत चौहान का आरोप है कि ठेकेदार ने अवैध कटिंग के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली और सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की। एनएच विभाग, तहसील और जिला प्रशासन की निष्क्रियता ने ठेकेदार के हौसले और बढ़ा दिए।

अब मामला सिर्फ पहाड़ कटाई का नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा हो गया है कि यह सब किसके संरक्षण में हुआ। यदि नोटिस और जुर्माने केवल औपचारिकता बनकर रहेंगे, तो ऐसी कार्रवाइयों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। समय रहते यदि जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

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