उत्तराखंडदेहरादून

पिटकुल का नया कीर्तिमान: मुनाफे, तकनीक और कर्मचारी हित के साथ 2026 का शंखनाद !

नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पावर ट्राँसमिशन कारपोरेशन ऑफ लि0 के प्रबन्ध निदेशक श्री पी0सी0 ध्यानी द्वारा पिटकुल के समस्त कार्मिकों को नव वर्ष की शुभकामानाएं प्रेषित की गयी तथा पिटकुल की उपलब्धियों को कार्मिकों के साथ साझा किया।

देहरादून: पावर ट्राँसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों, नवाचार और वित्तीय मजबूती का वर्ष रहा। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर “विद्युत भवन” मुख्यालय में आयोजित समारोह में प्रबंध निदेशक श्री पी.सी. ध्यानी ने न केवल बीते वर्ष की सफलताओं का ब्योरा दिया, बल्कि वर्ष 2026 और उससे आगे के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप भी साझा किया। “एक के लिए सब और सब के लिए एक” की भावना के साथ, पिटकुल ने ऊर्जा क्षेत्र में खुद को एक अग्रणी संस्था के रूप में स्थापित किया है।

नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पावर ट्राँसमिशन कारपोरेशन ऑफ लि0 के प्रबन्ध निदेशक श्री पी0सी0 ध्यानी द्वारा पिटकुल के समस्त कार्मिकों को नव वर्ष की शुभकामानाएं प्रेषित की गयी तथा पिटकुल की उपलब्धियों को कार्मिकों के साथ साझा किया।
नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पावर ट्राँसमिशन कारपोरेशन ऑफ लि0 के प्रबन्ध निदेशक श्री पी0सी0 ध्यानी द्वारा पिटकुल के समस्त कार्मिकों को नव वर्ष की शुभकामानाएं प्रेषित की गयी तथा पिटकुल की उपलब्धियों को कार्मिकों के साथ साझा किया।

ऐतिहासिक वित्तीय प्रदर्शन और लाभांश

पिटकुल की सफलता की कहानी इसके वित्तीय आंकड़ों में स्पष्ट रूप से झलकती है। प्रबंध निदेशक श्री ध्यानी ने गर्व के साथ साझा किया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में निगम ने 82.88 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ अर्जित किया। करों से पूर्व यह आंकड़ा 121.15 करोड़ रुपये था।

इस मुनाफे का लाभ न केवल सरकार को मिला, बल्कि कर्मचारियों को भी इसका हिस्सा दिया गया:

  • उत्तराखंड शासन को 12.5 करोड़ रुपये का लाभांश सौंपा गया।

  • नियमित कर्मचारियों और निदेशकों को उनके प्रदर्शन (KPI) के आधार पर 20,457 रुपये से लेकर 40,913 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी गई।

  • आउटसोर्स कर्मचारियों के योगदान को सराहते हुए उन्हें भी 10,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

पारेषण तंत्र में अभूतपूर्व विस्तार: 2004 से 2025 तक

पिटकुल की यात्रा 2004 में 17 उपसंस्थानों के साथ शुरू हुई थी, जो आज बढ़कर 51 हो गई है। 2030 तक इसे 72 तक ले जाने का लक्ष्य है। तकनीकी क्षमता में वृद्धि के आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • लाइन की लंबाई: 1589 सर्किट किमी (2004) से बढ़कर 3536 सर्किट किमी (2025) हो गई है। लक्ष्य: 2030 तक 4489 किमी।

  • सिस्टम उपलब्धता: 98.5% से बढ़कर 99.72% हो गई है, जो राष्ट्रीय मानकों पर उत्कृष्ट है।

  • लाइन लॉस (Line Loss): 2.33% से घटकर मात्र 1.02% रह गया है।

इस बेहतरीन प्रदर्शन के चलते पिटकुल की रेटिंग A+ से सुधरकर A++ हो गई है, जिससे निगम को ऋण पर 0.25% की छूट मिलेगी। इसका सीधा लाभ राज्य की जनता को सस्ती बिजली आपूर्ति के रूप में मिलेगा।

भविष्य की रूपरेखा: मास्टर प्लान 2040 और ‘विकल्प रहित संकल्प’

राज्य में बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए पिटकुल ने वर्ष 2040 तक का ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया है। इसमें नए बिजलीघरों की स्थापना, पुरानी लाइनों का सुदृढ़ीकरण और क्षमता वृद्धि शामिल है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित पांच नई परियोजनाओं (सेलाकुई, आराघर, धौलाखेड़ा, खटीमा, लोहाघाट) को समय से पूर्व पूरा करने का संकल्प लिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्र “सरलीकरण, समाधान एवं संतुष्टि” और “विकल्प रहित संकल्प” को अपनाते हुए, पिटकुल ने वर्ष 2026 के लिए 300 करोड़ रुपये के लाभ का लक्ष्य रखा है।

कर्मचारी कल्याण, खेल और सामाजिक सरोकार

प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया कि पिटकुल की असली ताकत इसके कर्मचारी हैं। वर्ष 2025 में कर्मचारियों के लिए कई कल्याणकारी कदम उठाए गए:

  • पदोन्नति और स्थायीकरण: 20 कर्मियों को पदोन्नति, 41 का स्थायीकरण और 114 को एसीपी का लाभ मिला।

  • शिकायत निवारण: “विधि वित्त एचआर आपके द्वार” जैसी योजनाओं के माध्यम से समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है।

  • खेल उपलब्धियां: राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कर्मचारियों ने परचम लहराया। सहायक अभियंता सुमित राणा (बैडमिंटन) और सुनीता बिष्ट (टेबल टेनिस) ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर विभाग का मान बढ़ाया।

  • सामाजिक दायित्व: रक्तदान शिविरों में रिकॉर्ड 190 यूनिट रक्तदान और “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत 2025 वृक्षों का रोपण किया गया।

अधिकारियों को निर्देश: संवाद ही समाधान है

समारोह के समापन और परिचालन अधिकारियों की बैठक में श्री ध्यानी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिकारी अपने एसी कमरों से बाहर निकलें। अधिशासी अभियंताओं को सप्ताह में एक बार और अधीक्षण अभियंताओं को 15 दिन में एक बार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया गया, ताकि व्यावहारिक समस्याओं का धरातल पर ही समाधान हो सके।

वर्ष 2025 के शानदार सफर के बाद, पिटकुल अब 2026 में प्रवेश कर रहा है—नई ऊर्जा, नए लक्ष्यों और उत्तराखंड को “ऊर्जा प्रदेश” बनाने के अटूट संकल्प के साथ।


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