
(PM Assam Speech highlights)असम में चुनावी सरगर्मियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुवाहाटी की वीर भूमि से न केवल विकास परियोजनाओं की सौगात दी, बल्कि विरोधियों पर तीखे प्रहार करते हुए राष्ट्रवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर देश का मूड सेट कर दिया। पुलवामा हमले की सातवीं बरसी पर शहीदों को नमन करते हुए पीएम मोदी ने एक भावुक और ओजस्वी भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना के शौर्य और केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को रेखांकित किया।

पुलवामा का जिक्र और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की हुंकार
भाषण की शुरुआत में ही माहौल तब भावुक हो गया जब प्रधानमंत्री ने पुलवामा के शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा, “आज 14 फरवरी है, पुलवामा हमले की बरसी। मैं मां भारती के उन वीर सपूतों के चरणों में शीश झुकाता हूं जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।”
प्रधानमंत्री ने कड़े शब्दों में याद दिलाया कि यह नया भारत है, जो सहता नहीं, बल्कि जवाब देना जानता है। उन्होंने हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया ने देखा है कि कैसे भारत आतंकियों को उनके बिलों में घुसकर सजा देता है।
कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘MMC बन गई है मुख्य विपक्षी पार्टी’
राजनीतिक हमलों को धार देते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस’ (MMC) का नया नाम दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह आजादी के समय मुस्लिम लीग ने देश को बांटा था, आज की कांग्रेस उसी रास्ते पर चल रही है।
पीएम ने पूछा, “क्या कांग्रेस में कभी देशहित के लिए कड़े फैसले लेने की हिम्मत थी? जो लोग उत्तर-पूर्व को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं, वे आज कांग्रेस के लिए पूजनीय बन गए हैं। कांग्रेस आतंकियों को कंधे पर बिठाती है और घुसपैठियों को बचाती है।”
असम के कार्यकर्ताओं को ‘सौभाग्य’ बताया
एक मंझे हुए संगठनकर्ता की तरह पीएम मोदी ने जनसभा में मौजूद भारी भीड़ के साथ-साथ विशेष रूप से भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “बड़ी रैलियां करना एक बात है, लेकिन जमीन पर पसीना बहाने वाले इन कार्यकर्ताओं के दर्शन करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भाजपा आज जहां है, वह इन्हीं कार्यकर्ताओं की तपस्या का फल है।”
अष्टलक्ष्मी और विकास का नया विजन
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ (समृद्धि की आठ देवियां) बताते हुए कहा कि भाजपा के लिए यह क्षेत्र केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि भक्तिभाव से सेवा करने का केंद्र है। उन्होंने हाल ही में पेश हुए आम बजट 2026 की बारीकियों को जनता के सामने रखते हुए आंकड़ों का खेल समझाया:
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टैक्स हिस्सेदारी: कांग्रेस के समय असम को केवल 10 हजार करोड़ मिलते थे, जबकि अब यह राशि 5 गुना बढ़कर 50 हजार करोड़ हो गई है।
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कुल निवेश: पिछले 11 वर्षों में असम को विकास के लिए 5.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है।
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कनेक्टिविटी: भास्कर सेतु जैसी परियोजनाओं के साथ हजारों करोड़ रुपये के नए रोड और हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
ब्रह्मपुत्र और रिवर टूरिज्म की नई राह
पीएम मोदी ने असम की जीवनरेखा, ब्रह्मपुत्र नदी के महत्व को साझा करते हुए अपने हालिया अनुभव को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के साथ ब्रह्मपुत्र के क्रूज पर बातचीत की थी। उन्होंने वादा किया कि आने वाले समय में ब्रह्मपुत्र न केवल असम की पहचान होगी, बल्कि रिवर टूरिज्म के जरिए यह रोजगार का भी बड़ा केंद्र बनेगी।
संस्कृति और पद्म पुरस्कारों का सम्मान
अपनी बात को मानवीय गरिमा से जोड़ते हुए पीएम ने कामाख्या मंदिर के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मां कामाख्या के आशीर्वाद से ही असम ने देश को कबीन्द्र पुरकायस्थ जैसी महान संतानें दी हैं। उन्होंने गर्व से बताया कि 2014 के बाद से पूर्वोत्तर के 125 से अधिक गुमनाम नायकों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जो इस धरती के सामर्थ्य को दुनिया के सामने लाता है।
निष्कर्ष: ‘विकसित भारत’ का आधार है पूर्वोत्तर
भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर जनता से भाजपा के लिए भारी बहुमत मांगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्वोत्तर का सामर्थ्य अब ‘विकसित भारत’ के निर्माण का सबसे बड़ा आधार है।
भाषण के बाद जनसभा में मौजूद लोगों के चेहरों पर एक अलग ही उत्साह था। पीएम मोदी का यह दौरा केवल चुनावी शंखनाद नहीं था, बल्कि असम के लोगों को यह एहसास दिलाना था कि दिल्ली अब उनके लिए दूर नहीं है, और उनकी भाषा, संस्कृति और सुरक्षा अब केंद्र की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य बातें (Quick Highlights):
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शहीदों को नमन: पुलवामा के वीर सपूतों और ऑपरेशन सिंदूर के वीरों को याद किया।
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तीखा प्रहार: कांग्रेस को ‘MMC’ (मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस) करार दिया।
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बजट का लाभ: असम की टैक्स हिस्सेदारी 10 हजार करोड़ से बढ़कर 50 हजार करोड़ हुई।
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कनेक्टिविटी: भास्कर सेतु और रिवर टूरिज्म पर विशेष जोर।
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संगठन शक्ति: बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को भाजपा की असली ताकत बताया।