
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन पर बिजलीकरण और सिग्नलिंग से जुड़े कार्य अक्टूबर 2024 से शुरू कर दिए जाएंगे। परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी मात्र ढाई घंटे में तय की जा सकेगी, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन बेहद आसान हो जाएगा।
परियोजना का निर्माण कार्य रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किया जा रहा है। आरवीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने मंगलवार को परियोजना से जुड़े विभिन्न प्रस्तावित स्टेशनों और सुरंगों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि इस रेल परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरी तरह से चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रेल लाइन के शुरू होने से उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए यातायात की सुविधाएं भी बेहतर होंगी।
परियोजना के तहत कई लंबी सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जो इसे तकनीकी रूप से एक चुनौतीपूर्ण लेकिन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बनाते हैं। निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सलीम अहमद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण स्थलों के आसपास व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाए ताकि पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित न हो।
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।