
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय गुणों से भरपूर सीबकथोर्न फल की खेती को बढ़ावा देकर प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिकी मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। सीबकथोर्न को आय बढ़ाने वाली फसल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
प्रदेश सरकार द्वारा सीबकथोर्न के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
पिथौरागढ़ जिले की दारमा और व्यास घाटी में वन विभाग ने सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की पहल शुरू कर दी है। यहां की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां सीबकथोर्न उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जा रही हैं। वन विभाग किसानों को पौध रोपण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध करा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीबकथोर्न फल में औषधीय और पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है, जिससे इसकी मांग आयुर्वेदिक, फार्मा और खाद्य उद्योग में लगातार बढ़ रही है। इससे आने वाले समय में किसानों को स्थायी आय का मजबूत स्रोत मिल सकता है।
सरकार का मानना है कि सीबकथोर्न की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएगी, बल्कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।