बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी गूंज

क्वेटा : पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में अलगाववादी भावनाएं एक बार फिर उबाल पर हैं। दशकों से चले आ रहे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असंतोष ने अब उग्र आंदोलन का रूप ले लिया है। जगह-जगह “स्वतंत्र बलूचिस्तान” के झंडे और नक्शे लहराए जा रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर #BalochistanRepublic ट्रेंड कर रहा है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में अस्थिरता के संकेत दे रहा है।
बलूच समुदाय की आवाज़: “हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं
बलूच कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह विरोध केवल स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय पहचान और आत्मनिर्णय की लड़ाई है। बलूच लेखक और कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने मीडिया से कहा यह केवल आंदोलन नहीं, यह एक राजनीतिक स्वतंत्रता की निर्णायक मांग है। हमने दशकों से अत्याचार सहा है, अब दुनिया को हमारी आवाज़ सुननी चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को “लोकतांत्रिक गणराज्य” के रूप में मान्यता देने की अपील की है।
क्षेत्र के अलगाववादी गुटों ने पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग को लेकर आवाज़ तेज़ कर दी है। दशकों से उपेक्षा और दमन का आरोप लगाते हुए, बलूच अलगाववादी नेताओं ने खुलेआम कहा है कि वे अब पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते।
बलूच अलगाववादी संगठनों जैसे बलूच लिबरेशन आर्मी और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स ने हाल के वर्षों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर कई हमले किए हैं।कुछ महीने पहले एक ट्रेन पर हमला कर सैकड़ों यात्रियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने सरकार को सकते में डाल दिया था।पाकिस्तानी सेना इन कार्रवाइयों को आतंकवाद करार देती है, जबकि विद्रोही गुट इसे अपनी राष्ट्रीय मुइस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश की अखंडता को चुनौती देने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्ति संग्राम बताते हैं सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, “हम आतंकवाद और देशविरोधी ताकतों से सख्ती से निपटेंगे।”
बलूच नेताओं का आरोप है कि
पाकिस्तान सरकार उनके प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास में प्रांत की अनदेखी हो रही है।जबरन गुमशुदगियों और सेना की बर्बर कार्रवाई से लोग भयभीत हैं।
पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि किसी भी प्रकार की अलगाववादी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और देश की अखंडता को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
साथ ही, सरकार ने इस आंदोलन को विदेशी साज़िश करार दिया है।