
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में विकास और आधुनिकता के दावों के बीच बाहरी दिल्ली की किराड़ी विधानसभा क्षेत्र स्थित शर्मा कॉलोनी की हकीकत बेहद दर्दनाक तस्वीर पेश कर रही है। करीब 35 साल पहले बसी यह कॉलोनी आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां की गलियां गंदे पानी, कीचड़ और कूड़े से लबालब हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
कॉलोनी की स्थिति इतनी भयावह है कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने के लिए लॉन्ग बूट पहनने को मजबूर हैं। कई बच्चों को कीचड़ और बदबूदार पानी से होकर निकलना पड़ता है, वहीं कई परिवारों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा पास में लैंडफिल का कचरा डाले जाने से समस्या और गंभीर हो गई है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी और सीवर का गंदा पानी गलियों में जमा रहता है। हालात ऐसे हैं कि हजारों लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं।
इलाके में रह रहे लोगों का कहना है कि बदबू और मच्छरों के प्रकोप से संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बुजुर्गों और बच्चों की सेहत सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद न तो स्थायी समाधान निकाला गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने सुध ली।
हालात से परेशान होकर कई परिवार कॉलोनी छोड़कर अन्य इलाकों में पलायन कर चुके हैं, जबकि जो लोग आर्थिक मजबूरी के चलते यहां रहने को विवश हैं, वे नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन बाद में यह इलाका फिर उपेक्षा का शिकार हो जाता है।
शर्मा कॉलोनी की यह तस्वीर न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या राजधानी के नागरिकों को भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?