
देहरादून, 14 जनवरी (संवाददाता): मकर संक्रांति के पावन पर्व पर बुधवार को श्री गुरुद्वारा साहिब डाकरा में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। ‘सरबंस दानी’ श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के परोपकारी जीवन और भगत नामदेव जी की स्मृति में आयोजित विशेष धार्मिक समागम के साथ ही 12 जनवरी से चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखण्ड पाठ का विधिवत भोग डाला गया।

रागी जत्थों ने बांधा समां कार्यक्रम की शुरुआत हजूरी रागी भाई अजित सिंह द्वारा की गई अरदास और कीर्तन से हुई। उन्होंने “राजन के राजा महाराजन के महाराजा, ऐसा राज्य छोड़ और दूजा कौन धियाएई” और “धन सो देश जहाँ तू वासिया” जैसे शबदों का गायन कर संगत को भावविभोर कर दिया।
इसके उपरांत दरबार साहिब, अमृतसर (पंजाब) से विशेष रूप से पधारे भाई सुखबीर सिंह ने कीर्तन दरबार की शोभा बढ़ाई। जब उन्होंने दशम पिता गुरु गोबिंद सिंह जी की रचना “देह शिवा बर मोहे ईहे, शुभ कर्मन ते कभुं न टरूं, न डरौं अरि सौं जब जाय लड़ौं, निश्चय कर अपनी जीत करौं” का गायन किया, तो पूरा हॉल ‘बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंज उठा। उन्होंने “हम अवगुण भरे एक गुण नाही” शबद के माध्यम से विनम्रता और भक्ति का संदेश दिया।

भक्तिमय हुआ माहौल समागम के अंत में भाई अजित सिंह द्वारा “सतनाम वाहे गुरु” का जाप कराया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और संगत आत्मिक शांति से सराबोर हो गई। अरदास के बाद गुरु का अटूट लंगर बरताया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
ये रहे उपस्थित इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। प्रमुख रूप से गुरुद्वारा प्रधान दलीप सिंह, महासचिव गुरमीत सिंह कैथ, देवेन्द्र पाल सिंह, गुरदीप सिंह, सरवण सिंह, अमरजीत सिंह, रंजीत कौर, जसविंदर कौर, हरभजन सिंह सोंधी, राजेंद्र कौर सोंधी, रघुवीर सिंह, कुलदीप सिंह, हरमहिन्दर सिंह, सुरजीत सिंह और दलजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी।