
नई दिल्ली: हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रही। शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली, लेकिन बाद में बाजार ने रिकवरी करते हुए हरे निशान में वापसी कर ली।
इससे पहले मंगलवार को बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी। 30 शेयरों वाला BSE Sensex 639.82 अंक की बढ़त के साथ 78,205.98 पर बंद हुआ था। वहीं 50 शेयरों वाला NSE Nifty 50 233.55 अंक चढ़कर 24,261.60 पर बंद हुआ था।
शुरुआती कारोबार में गिरावट
बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में बाजार में हल्की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 96.12 अंक गिरकर 78,109.86 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 22.95 अंक फिसलकर 24,238.65 के स्तर पर आ गया।
बाजार की इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि कुछ ही समय बाद बाजार में खरीदारी बढ़ने से दोनों सूचकांक हरे निशान में लौट आए।
रुपये में भी हल्की कमजोरी
इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे कमजोर होकर 91.89 के स्तर पर पहुंच गया।
सेंसेक्स की कंपनियों का प्रदर्शन
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank, Axis Bank, HDFC Bank, Hindustan Unilever और Bajaj Finserv के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
वहीं दूसरी ओर InterGlobe Aviation, Adani Ports, Tata Steel और NTPC Limited के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
बाजार में सतर्कता का माहौल
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म Enrich Money के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, मंगलवार को बाजार में तकनीकी सुधार जरूर देखा गया, लेकिन निवेशकों के बीच अभी भी सतर्कता बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है। ऊर्जा कीमतों में तेजी, प्रमुख शिपिंग मार्गों में संभावित व्यवधान और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी जैसे कारक बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।
वैश्विक संकेतों पर नजर
वहीं LiveLong Wealth के रिसर्च एनालिस्ट और संस्थापक हरिप्रसाद के का कहना है कि वैश्विक संकेत फिलहाल मिले-जुले बने हुए हैं। निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे भू-राजनीतिक हालात में बाजार में अस्थिरता बढ़ना सामान्य है, क्योंकि वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और जोखिम वाले बाजारों में अपनी हिस्सेदारी कम कर देते हैं।