

ऋषिकेश/देहरादून (2 फरवरी 2026): ऋषिकेश में वन भूमि प्रकरण को लेकर आज जनता का गुस्सा फूट पड़ा। अपने आशियाने बचाने की मुहिम में ‘बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले आयोजित महारैली में जनसैलाब उमड़ आया। शिवाजी नगर, बापू ग्राम, मीरा नगर, 20 बीघा, मनसा देवी और अमित ग्राम के करीब 20 हजार से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे पूरा शहर थम गया।

आईडीपीएल से तहसील तक 8 किमी लंबा मार्च रैली आईडीपीएल (IDPL) के खेल मैदान से शुरू होकर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए 8 किलोमीटर का सफर तय कर ऋषिकेश तहसील पहुंची। शहर चोक: भीड़ इतनी जबरदस्त थी कि रैली की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर तक खिंच गई। ऋषिकेश का ट्रैफिक पूरी तरह जाम हो गया और लोग गलियों से निकलने को मजबूर हो गए। नारेबाजी: प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में सरकार से मांग की कि उनके घरों को उजड़ने से बचाया जाए। उन्होंने एसडीएम के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे आजादी के दशक से पहले से यहां बसे हैं। सरकार वन भूमि प्रकरण में ‘डिफॉरेस्ट’ (De-forest) का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजे या फिर इन क्षेत्रों को ‘राजस्व ग्राम’ घोषित करे। लोगों का कहना है कि जब सरकार ने यहां करोड़ों रुपये खर्च कर बिजली, पानी और सड़क जैसी सुविधाएं दी हैं, तो अब उन्हें अवैध बताकर उजाड़ना कहां का न्याय है?
क्यों उजड़ रहे हैं घर? (कानूनी पेंच) यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जुड़ा है।
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इतिहास: 26 मई 1950 को करीब 2,866 एकड़ वन भूमि ‘पशु लोक सेवा मंडल’ को 99 साल की लीज (2049 तक) पर दी गई थी। शर्त थी कि इसका उपयोग चारा उत्पादन और पशुपालन के लिए होगा।
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उल्लंघन: आरोप है कि शर्तों का उल्लंघन कर जमीन को सब-लीज पर दिया गया और वहां रिहायशी कॉलोनियां बस गईं।
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कोर्ट का डंडा: सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जों पर सख्त टिप्पणी करते हुए सर्वे और कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसी के बाद वन विभाग ने नपाई और नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसका जनता विरोध कर रही है।