नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने टीएचडीसी के शेयर विवाद से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिका को “सुनवाई योग्य नहीं” मानते हुए याचिकाकर्ताओं पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

क्या कहा कोर्ट ने
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने साफ कहा कि यह याचिका जनहित के दायरे में नहीं आती। इसलिए इसे निस्तारित करते हुए जुर्माना लगाया गया। कोर्ट ने यह राशि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में क्या था मुद्दा
याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह और अन्य ने केंद्र सरकार द्वारा टीएचडीसी के शेयरों में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि यह निर्णय कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 14 के प्रावधानों का पालन किए बिना लिया गया, जो अनुचित है।
सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला
याचिका में यह भी बताया गया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच टीएचडीसी में 25% हिस्सेदारी को लेकर विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में केंद्र सरकार की कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई थी।
25% हिस्सेदारी को लेकर विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद टीएचडीसी में 25% हिस्सेदारी को लेकर है।
- उत्तराखंड का दावा: परियोजना राज्य में होने के कारण उसे हिस्सा मिलना चाहिए
- उत्तर प्रदेश का पक्ष: वह भी अपनी हिस्सेदारी का दावा कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल कर चुका है