
देहरादून: ‘स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025’, जिसका विषय “अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव” था, सोमवार को देहरादून स्थित लेखक ग्राम में उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण किया गया। यह महोत्सव उत्तराखंड राज्य के गठन के 25 वर्ष और अटल बिहारी वाजपेयी के ‘लेखक ग्राम’ के स्वप्न के 25 वर्ष को समर्पित था।

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका स्वागत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया। रिजिजू ने ‘लेखक ग्राम’ को रचनात्मकता, ज्ञान और हिमालयी प्रेरणा का केंद्र बनाने के लिए डॉ. निशंक के कार्यों की सराहना की।
अपने संबोधन में रिजिजू ने कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से होने के कारण हिमालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान का प्रतीक है।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत क्षेत्रों जैसे गुंजी में सड़क संपर्क और अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। रिजिजू ने कहा, “भारत की सुंदरता इसकी विविधता में निहित है — हम भले अलग भाषाएँ बोलते हों और अलग परंपराएँ निभाते हों, लेकिन हमारे मूल्य और दृष्टि हमें एक सूत्र में बांधते हैं।”
कार्यक्रम में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि ‘लेखक ग्राम’ पहल का उद्देश्य गाँवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों में विकसित करना है।
आचार्य बालकृष्ण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पतंजलि ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के योगदान का उल्लेख किया और रिजिजू का स्वागत किया।
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने ‘लेखक ग्राम’ की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ती है।
इस अवसर पर प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया) ने लोकतांत्रिक संवाद को प्रोत्साहित करने में रिजिजू की भूमिका की सराहना की और भारत के ‘स्वच्छता अभियान’ की प्रशंसा की। पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय (एम्स गुवाहाटी) ने हिमालयी परंपराओं के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान पर प्रकाश डाला।
स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने जीवन में अध्यात्म, सेवा और नैतिक अनुशासन के महत्व पर बल दिया। प्रो. पृथ्वीराज, उपाध्यक्ष ने डॉ. निशंक के हिमालयी एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना की और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि किरेन रिजिजू के प्रेरणादायी शब्दों ने हिमालय और जनमानस के गहरे संबंध को पुनः जीवंत कर दिया।