संसद में गूंजा अंकिता भंडारी और ‘मोहम्मद’ दीपक का मुद्दा; इमरान प्रतापगढ़ी ने शायराना अंदाज में सरकार को घेरा- ‘अमन की बात करने वाले पर ही FIR’

नई दिल्ली/देहरादून (6 फरवरी 2026):
उत्तराखंड के दो ज्वलंत मुद्दे—अंकिता भंडारी हत्याकांड और हालिया कोटद्वार का ‘मोहम्मद’ दीपक विवाद—अब संसद के गलियारों तक पहुंच गए हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने शायराना अंदाज में सरकार पर तंज कसते हुए कानून व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
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अंकिता भंडारी केस: ‘आखिर वो VIP कौन था?’
इमरान प्रतापगढ़ी ने सदन में कहा कि एक तरफ राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री मेज थपथपा रहे थे, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड की अभागी बेटी अंकिता भंडारी के इंसाफ की आवाजें मध्यम पड़ रही थीं। उन्होंने सीधा सवाल दागा, “आज भी देश और अंकिता का परिवार यह पूछ रहा है कि आखिर वो VIP कौन था, जिसके लिए अंकिता को मार दिया गया?”
कोटद्वार विवाद: ‘बुजुर्ग को बचाने वाले पर मुकदमा, दंगाई आजाद’
सांसद ने कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम की दुकान को लेकर हुए विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोटद्वार में नफरती भीड़ से एक बुजुर्ग दुकानदार को बचाने के लिए जिम संचालक दीपक कुमार (जिन्होंने विरोध स्वरूप अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था) सामने आए।
FIR पर सवाल: प्रतापगढ़ी ने कहा, “यह नया भारत है, जहां दंगाइयों पर नहीं, बल्कि मोहब्बत की रोशनी लेकर खड़े होने वाले और अमन-चैन की बात करने वाले दीपक के खिलाफ पुलिस गंभीर धाराओं में FIR दर्ज करती है।”
सीएम पर निशाना: उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब यह सब हो रहा था, तब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कोटद्वार में ही मौजूद थे।
शायराना हमला:
इमरान ने अपनी बात की शुरुआत इस शेर से की:
“बात दलीलों से रद्द होती है, उनके होठों की खामोशी भी सनद होती है।
कुछ नहीं कहने से भी छिन जाता है एजाजे सुखन, जुल्म सहने से भी जालिम की मदद होती है।”
क्या है दीपक कुमार विवाद?
कोटद्वार में 26 जनवरी को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा दुकान का नाम ‘बाबा’ रखने पर विरोध जताया था। तब पड़ोसी जिम संचालक दीपक कुमार ने भीड़ का विरोध किया था। नाम पूछने पर आक्रोश में उन्होंने कहा था- “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है, क्या कर लोगे?” इसके बाद उन पर केस दर्ज हुआ, जिसकी राहुल गांधी और ओवैसी ने भी आलोचना की थी।