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शिबू सोरेन के निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी समुदाय के प्रमुख नेता शिबू सोरेन का सोमवार की सुबह दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करके दी। भावुक संदेश में हेमंत सोरेन ने लिखा, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं।”

शिबू सोरेन के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे सामाजिक न्याय के क्षेत्र की बड़ी क्षति बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक जमीनी नेता बताते हुए कहा कि वे जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में तरक्की करते रहे। मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, “शिबू सोरेन आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए खास तौर पर प्रतिबद्ध रहे। उनके निधन से दुख हुआ है।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने शिबू सोरेन को झारखंड ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासियों की सबसे बुलंद आवाज और सबसे बड़ी पहचान बताया। उन्होंने कहा कि चाहे झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में हों या केंद्र में, शिबू सोरेन ने हमेशा गरीबों, मजदूरों और विशेषकर आदिवासियों के अधिकारों की बात की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें झारखंड के कद्दावर नेताओं में गिनाते हुए कहा कि वे जीवन भर समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए संघर्ष करते रहे। बिहार के राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने शिबू सोरेन को दलितों और आदिवासियों का महान नेता बताते हुए उनके निधन को राजनीति के लिए बहुत बड़ी क्षति करार दिया।

शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष से भरा रहा। उन्होंने झारखंड राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया। उनके निधन से न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में आदिवासी समुदाय ने अपना एक महत्वपूर्ण नेता खो दिया है।

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