‘घोस्ट विलेज’ फिर होंगे आबाद? सांसद अनिल बलूनी की प्रवासियों से भावुक अपील- ‘साल में एक खुशी गांव में मनाएं, वरना खत्म हो जाएगी पहाड़ की सियासी ताकत’

पौड़ी/देहरादून (31 जनवरी 2026): पहाड़ के खाली होते गांव और खंडहर में तब्दील होते पुश्तैनी मकानों को दोबारा आबाद करने के लिए गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने एक बड़ी मुहिम छेड़ दी है। इसी कड़ी में वे पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक स्थित ‘पातली’ गांव पहुंचे। यह गांव अब एक ‘घोस्ट विलेज’ (Ghost Village) बन चुका है। यहां उन्होंने देहरादून और महानगरों में बस चुके प्रवासियों के साथ संवाद किया और उनसे ‘रिवर्स पलायन’ की भावुक अपील की।
सांसद का ‘3 मंत्र’ फार्मूला: जन्मदिन, त्योहार और शादी अनिल बलूनी ने प्रवासियों से कहा कि अगर हमें अपनी जड़ों को बचाना है, तो छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे। उन्होंने लोगों से तीन प्रमुख अपील कीं:
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त्योहार: साल में कम से कम एक लोकपर्व (जैसे इगास) अपने गांव में मनाएं।
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जन्मदिन: परिवार के किसी एक सदस्य का जन्मदिन गांव आकर मनाएं।
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देश की सुरक्षा: उन्होंने कहा कि उत्तराखंड चीन सीमा से सटा है। सीमांत गांवों के लोग ‘बिना वर्दी के सैनिक’ हैं। अगर ये गांव खाली हुए तो देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होगा।
विवाह: घर में होने वाला कोई एक विवाह समारोह अपने पैतृक गांव में आयोजित करें। उन्होंने कहा, “जब हम ऐसा करेंगे, तो हमारे बच्चे स्वाभाविक रूप से अपनी संस्कृति और पुरखों से जुड़ेंगे। पीएम मोदी के ‘वेडिंग इन उत्तराखंड’ के आह्वान को हमें अपने निजी जीवन में अपनाना होगा।

‘पहाड़ खाली हुआ तो सियासी वजूद मिट जाएगा’ सांसद बलूनी ने पलायन के राजनीतिक और सामरिक खतरों से भी आगाह किया। भावुक हुए प्रवासी संवाद के दौरान अपने उजड़ते आशियानों को देखकर प्रवासी ग्रामीण भावुक हो गए। बलूनी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे गांवों में बुनियादी सुविधाएं और रोजगार लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शुरुआत लोगों को ही करनी होगी। घटती सीटें: उन्होंने चिंता जताई कि पहाड़ खाली होने से विधानसभा सीटें कम हो रही हैं। पौड़ी में सीटें 8 से घटकर 6 हो गई हैं, भविष्य में ये 4 भी रह सकती हैं। चमोली, नैनीताल और पिथौरागढ़ में भी यही खतरा मंडरा रहा है। अगर पहाड़ की आबादी नहीं बची, तो पहाड़ की आवाज उठाने वाला कोई नहीं बचेगा।
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