
देहरादून, 25 सितम्बर: उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग ने राष्ट्रीय महिला आयोग के अभियान “नवरात्रि – नवशक्ति नवसंकल्प” के तहत झाझरा पंचायत भवन, देहरादून में “सफल महिला उद्यमियों के साथ चर्चा कार्यक्रम” का आयोजन किया। इस दौरान महिला उद्यमियों ने अपनी प्रेरक कहानियाँ साझा कीं और आत्मनिर्भरता की मिसाल प्रस्तुत की।
आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि महिलाएँ आज सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं और प्रदेश की आर्थिकी को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी अब सिर्फ गृहस्थी तक सीमित नहीं है, बल्कि मेहनत और नवाचार से समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, महिला उद्यम निधि योजना, ड्रोन दीदी योजना और लखपति दीदी योजना जैसी पहल महिलाओं के लिए नए अवसर खोल रही हैं। इन योजनाओं की मदद से महिलाएँ न केवल खुद रोजगार पा रही हैं बल्कि दूसरों को भी रोज़गार उपलब्ध करा रही हैं।
कार्यक्रम में महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए।
दीपा बछैती ने बताया कि उनके क्लस्टर से जुड़ी 100 से अधिक महिलाएँ अचार, पापड़, राशन, घी, दूध, सिलाई और बुनाई का कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें 20 हजार रुपये तक मासिक आय हो रही है।
पूनम ने बताया कि मुद्रा लोन से उन्होंने डिजिटल बोर्ड के माध्यम से ट्यूशन सेंटर शुरू किया है, जहाँ हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
वैष्णवी ने कहा कि उन्होंने सरकारी लोन से नमक की विभिन्न वैरायटी तैयार की है, जो अब अमेज़ॉन पर भी बिक रही है और उन्हें 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है।
आयोग की सदस्य सचिव उर्वशी चौहान ने महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनी संरक्षण संबंधी जानकारी दी।
इस मौके पर बड़ी संख्या में बालाजी क्लस्टर की महिलाएँ, सखी समूह और ग्राम संगठन झाझरा की महिलाएँ मौजूद रहीं। साथ ही ब्लॉक प्रमुख अल्पना रावत, बीडीसी मेम्बर सूरज चौधरी, आयोग के विधि अधिकारी दयाराम सिंह, उपनिरीक्षक स्वाति चमोली, संगीता मौर्य, इंदर सिंह चौहान, नारायण तोमर, शानू रावत, अंजली, वीरेंद्र रावत और पूजा दास भी उपस्थित रहे।