देहरादून : विकसित भारत के लिए शिक्षा क्षेत्र में उत्तराखंड का योगदान, मुख्य सचिवों की बैठक हेतु कार्यशाला संपन्न

देहरादून: उत्तराखंड के तत्वावधान में भारत सरकार की 5वीं मुख्य सचिवों की बैठक के लिए राज्य के दृष्टिकोण को तैयार करने हेतु आज द प्राइड प्राइमर सोलिटेयर होटल, देहरादून में एक महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य “ह्यूमन कैपिटल फॉर विकसित भारत” की थीम के अंतर्गत शिक्षा क्षेत्र में उत्तराखंड की भूमिका को परिभाषित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रमन, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गब्र्याल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा मुकुल कुमार सती, अपर राज्य परियोजना निदेशक कुलदीप गैरोला और गढ़वाल विश्वविद्यालय के बादशाही थौल परिसर की शिक्षा संकाय प्रमुख डॉ सुनीता गोदियाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस कार्यशाला में राज्य के सभी स्तरों के अधिकारियों, एससीईआरटी, डाइट और विभिन्न विद्यालयों के विशेषज्ञ शिक्षकों ने भागीदारी की।
अपर राज्य परियोजना निदेशक श्री कुलदीप गैरोला ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड द्वारा चुने गए “स्कूलिंग- बिल्डिंग ब्लॉक्स” विषय पर राज्य का व्यापक दृष्टिकोण तैयार करना है। सचिव विद्यालयी शिक्षा ने अपने उद्बोधन में जानकारी दी कि भारत सरकार प्रतिवर्ष मुख्य सचिवों की बैठक आयोजित करती है, जिसमें देश की प्रमुख चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श होता है। इस वर्ष विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पांच मुख्य बिंदुओं पर फोकस किया गया है।
कार्यशाला की पहली प्रक्रिया में राज्य के अधिकारियों से प्राप्त कुल 279 फीडबैक में से सर्वश्रेष्ठ 102 फीडबैक को CS कॉन्फ्रेंस पोर्टल पर अपलोड करने हेतु राज्य सरकार को भेजा गया है। सचिव महोदय ने कार्यशाला के प्रतिभागियों से उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर गहन मंथन करते हुए उचित समाधान प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने निजी विद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए विशेष आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को 10 समूहों में विभाजित किया गया और प्रत्येक समूह को अलग-अलग विषयों पर कार्य करने का अवसर दिया गया। विचार मंथन सत्र के बाद प्रत्येक समूह ने राज्य के संदर्भ में अपनी चुनौतियों और समाधान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ मुकुल कुमार सती और निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गब्र्याल ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ बी पी मैंदोली द्वारा और समन्वयन उप राज्य परियोजना निदेशकअजीत भंडारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर उप राज्य परियोजना निदेशक पल्लवी नैन, प्रद्युम्न सिंह रावत, फातिमा एवं राज्य परियोजना कार्यालय का संपूर्ण स्टाफ उपस्थित रहा। यह कार्यशाला विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा क्षेत्र की भूमिका को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।