विकासनगर: भादो महीने में मनेगा महासू देवता का जागरा पर्व, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ेगी भीड़

विकासनगर: देवभूमि उत्तराखंड के देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में आराध्य महासू देवता के जागरा पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। भादो महीने में मनाए जाने वाले इस पावन पर्व के लिए इस बार 26-27 अगस्त की तारीख तय की गई है। हनोल, दसऊ और थैना स्थित महासू मंदिरों में रात्रि जागरण का आयोजन होगा, जहां हजारों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद है। प्रशासन और मंदिर समितियां इस महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर की तैयारियों में पूरी तरह से जुटी हुई हैं।
जौनसार बावर के लोगों की अपने इष्ट देवता महासू के प्रति अटूट आस्था और विश्वास की परंपरा सदियों पुरानी है। महासू देवता का मुख्य मंदिर हनोल में स्थित है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। प्रतिवर्ष भादो महीने में मनाए जाने वाले इस जागरा पर्व में न केवल स्थानीय जनजातीय समुदाय के लोग भाग लेते हैं, बल्कि गढ़वाल और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
26 अगस्त को महासू मंदिर हनोल, सीद्ध पीठ थैना और छत्रधारी चालदा महासू मंदिर दसऊ में रात्रि जागरण का कार्यक्रम आयोजित होगा। इस दिन हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य देव के दर्शन के लिए इन पवित्र स्थलों पर एकत्र होंगे। 27 अगस्त को शुभ मुहूर्त में देवनांयणी (देवता का पवित्र स्नान) की विशेष परंपरा का निर्वाह किया जाएगा, जो इस पर्व की मुख्य विशेषता है।
तहसीलदार त्यूणी सुशीला कोठियाल ने बताया कि हनोल स्थित महासू मंदिर में जागरा पर्व की व्यापक तैयारियों में प्रशासन पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पर्व को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ हिमाचल और गढ़वाल के श्रद्धालुओं में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो।
महासू देवता की परंपरा की विशेषता यह है कि यह केवल एक देवता नहीं बल्कि चार भाइयों का सामूहिक स्वरूप है। ये चारों भाई पवासी महासू, बाशिक महासू, बौठा महासू और चालदा महासू के नाम से जाने जाते हैं। बौठा महासू महाराज का मुख्य मंदिर हनोल में स्थित है, बाशिक महासू महाराज का मंदिर मेंद्रथ में है, पवासी महासू महाराज का मंदिर ठढियार में है, जबकि छत्रधारी चालदा महासू महाराज चलाए मान देवता हैं यानी वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते रहते हैं।
वर्तमान में छत्रधारी चालदा महासू महाराज दसऊ गांव के मंदिर में विराजमान हैं। परंपरा के अनुसार नवंबर महीने में वे दसऊ गांव से अपने अगले पड़ाव के लिए हिमाचल प्रदेश के पश्मी क्षेत्र के लिए प्रस्थान करेंगे। हनोल में बौठा महासू महाराज के बाद द्वितीय सिद्ध पीठ थैना गांव में भी महासू महाराज विराजमान हैं, जो इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
जौनसार बावर की जनजातीय संस्कृति में महासू महाराज के जागरा पर्व का विशेष महत्व है। यहां के लोग पीढ़ियों से इस पर्व को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते आ रहे हैं। श्रद्धालु इस पवित्र अवसर पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का भी जीवंत उदाहरण है।