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WPL 2026: वर्ल्ड कप जीत की चमक और अपने दम पर खड़ा महिला क्रिकेट; अब पहचान नहीं, परफॉरमेंस की है गूंज !

नई दिल्ली: महिला प्रीमियर लीग (WPL) का चौथा सीजन शुरू होने के लिए तैयार है, और इस बार का माहौल पिछले सीजनों से बिल्कुल अलग है। महिला वनडे वर्ल्ड कप में भारत की शानदार जीत की चमक अभी फीकी नहीं पड़ी है और इसी उत्साह के बीच WPL 2026 का आगाज हो रहा है।

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साल 2023 में जब डब्ल्यूपीएल (WPL) का पहला सीजन आया था, तब टीवी पर बार-बार ‘पहचान’ शब्द गूंजता था। मकसद था लीग को दर्शकों से परिचित कराना। लेकिन तीन साल बाद, वह जरूरत खत्म हो चुकी है। अब यह लीग अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी है और भारतीय क्रिकेट के इकोसिस्टम में अपनी जगह बना चुकी है।

टिकटों की बिक्री और बदलता नजरिया लीग की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो मैच पहले सीजन में फ्री थे, अब उनके लिए दर्शकों को टिकट खरीदने पड़ रहे हैं। हालांकि इससे होने वाली कमाई आईपीएल (IPL) की तुलना में कम है, लेकिन यह बदलाव महत्वपूर्ण है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को स्मृति मंधाना के बिना या मुंबई इंडियंस (MI) को हरमनप्रीत कौर के बिना सोचना अब मुश्किल है, जो दर्शाता है कि फैंस का अपनी टीमों और खिलाड़ियों से जुड़ाव कितना गहरा हो चुका है। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि बीसीसीआई (BCCI) ने इस बार ‘होम-एंड-अवे’ (घरेलू और बाहरी मैदान) प्रारूप न अपनाकर एक मौका गंवा दिया है।

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प्रतिभा को मिला असली मंच आईपीएल की टैगलाइन “जहां प्रतिभा को अवसर मिलता है” (Talent meets opportunity) को WPL ने सच कर दिखाया है। 2024 के सीजन के पहले मैच में एस. सजना का आखिरी गेंद पर छक्का हो या आशा शोभना का पांच विकेट लेना, इस लीग ने घरेलू खिलाड़ियों को वह शोहरत दी जो सालों की मेहनत नहीं दे पाई थी।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण क्रांति गौड़ हैं। एक साल पहले तक वे घरेलू क्रिकेट तक सीमित थीं, लेकिन WPL की स्काउटिंग ने उन्हें खोज निकाला। आज वह वर्ल्ड कप विजेता हैं और मध्य प्रदेश में क्रिकेट के बदलाव का चेहरा बन गई हैं। उनके अलावा, गुजरात जायंट्स (GG) द्वारा खोजी गईं अनुष्का शर्मा, मुंबई इंडियंस (MI) की राहिला फिरदौस और संस्कृति गुप्ता जैसी खिलाड़ी अब बड़े मंच पर चमक रही हैं। दिल्ली कैपिटल्स (DC) द्वारा आंध्र प्रदेश के अंदरूनी इलाकों से खोजी गईं एन. श्री चरणी की कहानी भी ऐसी ही है, जो आज भारत की टी20 गेंदबाजी का मुख्य हिस्सा हैं।

स्पॉन्सरशिप: अब सहानुभूति नहीं, मुनाफे का सौदा WPL की सफलता ने इस धारणा को तोड़ दिया है कि महिला क्रिकेट में रुचि केवल वर्ल्ड कप के दौरान होती है। अब स्पॉन्सरशिप का मतलब सिर्फ महिला खेल को ‘सपोर्ट’ करना नहीं, बल्कि ‘रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट’ (ROI) है। ब्रांड्स अब खिलाड़ियों को साल भर की संपत्ति (assets) के रूप में देखते हैं।

रिकॉर्ड तोड़ व्यूअरशिप हाल ही में हुए महिला वर्ल्ड कप फाइनल ने जियोस्टार (Jiostar) पर 185 मिलियन दर्शकों का रिकॉर्ड बनाया, जो 2024 के पुरुष टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के बराबर है। डिजिटल पहुंच 446 मिलियन तक पहुंच गई, जो महिला आईसीसी इवेंट के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

WPL के पहले तीन सीजनों ने इसे भारतीय क्रिकेट में जगह दिलाई, लेकिन 2026 का यह सीजन महिला खेल और उसमें भारत की स्थिति को फिर से परिभाषित करने वाला है।

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