देहरादून: उत्तराखंड सरकार द्वारा दून अस्पताल के पास अवैध मजार ध्वस्त होने पर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना।

उत्तराखंड सरकार द्वारा अवैध धार्मिक स्थलों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजधानी देहरादून में एक और कार्रवाई की गई। बीती रात प्रशासन ने दून अस्पताल के मुख्य गेट के पास बनी एक मजार को अवैध अतिक्रमण मानते हुए ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
जानकारी के अनुसार, ऋषिकेश निवासी पंकज गुप्ता ने इस मजार को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और दून अस्पताल प्रशासन की संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। जांच में यह पाया गया कि मजार सरकारी भूमि पर बिना किसी वैध दस्तावेज के बनाई गई थी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मजार को हटाने का निर्णय लिया।
कांग्रेस ने जताई आपत्ति
इस कार्रवाई पर कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा,
“अगर कोई निर्माण अवैध है तो उसे हटाइए, हमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन सरकार का एजेंडा केवल मदरसों और मजारों को निशाना बनाने तक सीमित रह गया है। केंद्र और राज्य सरकार समाज में नफरत फैलाने और विभाजन करने का काम कर रही हैं।”
धस्माना ने आगे कहा कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड, जो वर्षों से मजारों का प्रबंधन कर रहा है, इस कार्रवाई का उचित जवाब देगा।
सरकार की सफाई
धामी सरकार का कहना है कि यह अभियान किसी एक धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि अवैध अतिक्रमण को हटाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। सरकार के अनुसार, अब तक प्रदेश भर में 500 से अधिक अवैध मजारें, 135 अवैध मदरसे और 50 से अधिक अवैध मंदिरों को हटाया जा चुका है।
इससे पहले भी 22 अप्रैल को रुद्रपुर में नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के दौरान एक मजार को हटाया गया था, जिसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
उत्तराखंड में अवैध धार्मिक स्थलों के खिलाफ सरकार का अभियान लगातार तेज हो रहा है, लेकिन विपक्ष इसे धार्मिक भेदभाव का रंग देने का आरोप लगा रहा है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत किस दिशा में बढ़ती है।