कोलकाता होटल अग्निकांड: 15 की मौत, 88 लोग थे होटल में ठहरे, बचने के लिए कूदे लोग; जांच के लिए एसआईटी गठित

कोलकाता, पश्चिम बंगाल – कोलकाता के भीड़भाड़ वाले मछुआपट्टी इलाके में मंगलवार रात एक सस्ते होटल ऋतुराज में भयंकर आग लगने से हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक महिला और दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 13 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
42 कमरों में ठहरे थे 88 लोग, जान बचाने के लिए कूदे लोग
यह हादसा मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे हुआ जब होटल में आग लगने की सूचना मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही होटल में अफरा-तफरी मच गई। 42 कमरों में 88 लोग ठहरे हुए थे और कई लोग जान बचाने के लिए बालकनी और खिड़कियों से कूद गए, जिससे कई घायल हो गए। दमकल की 10 गाड़ियों को मौके पर भेजा गया, जिन्होंने करीब 10 घंटे की मशक्कत के बाद बुधवार सुबह 3:30 बजे आग पर काबू पाया।
आग लगने का कारण अब तक स्पष्ट नहीं
अग्निशमन विभाग और कोलकाता पुलिस के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच जारी है। फोरेंसिक टीम को इमारत की जांच के लिए लगाया गया है और घटनास्थल को चारों तरफ से सील कर दिया गया है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, किया मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को PMNRF (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता देने की घोषणा की। पीएम ने ट्वीट कर कहा, “कोलकाता में आग की घटना से दुखी हूं। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”
राजनीतिक विवाद: भाजपा ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब कोलकाता जल रहा था, मुख्यमंत्री दीघा में एक धार्मिक कार्यक्रम में व्यस्त थीं। मजूमदार ने कहा, “जब राज्य की राजधानी में निर्दोष लोग जलकर मर रहे थे, तब मुख्यमंत्री धार्मिक दिखावे और राजनीतिक लाभ में व्यस्त थीं।”
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस भयावह अग्निकांड ने सस्ते होटलों की सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी नियमों की पोल खोल दी है। यह जांच का विषय है कि क्या होटल को चलाने के लिए जरूरी फायर एनओसी और सुरक्षा उपाय मौजूद थे या नहीं।
कोलकाता का यह अग्निकांड न केवल एक मानव त्रासदी है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर संकेत भी है। अब निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी होंगी।