अंकिता हत्याकांड: चांद की रिपोर्ट से पकड़ा गया आरोपियों का झूठ

नई दिल्ली: अंकिता हत्याकांड मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके सहयोगी सौरभ भास्कर तथा अंकित को उम्रकैद की सजा दी गई है। इस केस में न्याय दिलाने में एक अनोखी वैज्ञानिक रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई, जिसने आरोपियों के झूठ का पर्दाफाश किया।
चांद की गति से खुले काले राज
18 सितंबर की उस काली रात को लेकर पुलकित आर्य ने जो कहानी गढ़ी थी, वह कोलकाता वेधशाला की एक साधारण रिपोर्ट से झूठी साबित हो गई। पुलकित का दावा था कि रात 9 बजे घटना के समय काफी प्राकृतिक रोशनी थी और चांद की रोशनी में उन्हें सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था।
वेधशाला की रिपोर्ट ने किया पर्दाफाश
अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य संख्या 123 के रूप में पेश की गई कोलकाता वेधशाला की ई-मेल रिपोर्ट ने सच्चाई सामने लाई। इस रिपोर्ट के अनुसार:
– घटना का समय: 18 सितंबर, रात 9 बजे
– चांद उदय का समय: रात 11 बजे (घटना के 2 घंटे बाद)
– चांद्र तिथि: कृष्ण पक्ष की अष्टमी (अत्यंत कम चांदनी)
पुलकित की झूठी कहानी
पुलकित ने पुलिस को बताया था कि:
– वह अंकिता के साथ नहर की पटरी पर बात कर रहा था
– अंकिता ने उसका मोबाइल छीनकर पानी में फेंक दिया
– इसके बाद अंकिता दुर्घटनावश नहर में गिर गई
– उस समय पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी थी
वैज्ञानिक साक्ष्य ने तोड़ा झूठ
पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 91 के तहत कोलकाता वेधशाला से पूछताछ की। वेधशाला की रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि:
– घटनास्थल पर रात 9 बजे चांद ही नहीं निकला था
– चांद रात 11 बजे निकला था
– कृष्ण पक्ष की अष्टमी होने के कारण चांदनी भी न्यूनतम थी
– पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी का दावा पूर्णतः झूठा था
इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने अदालत में आरोपियों की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चांद की गति और समय की गणना ने उस अंधेरी रात के काले राज को उजागर कर दिया, जिससे अंकिता को न्याय मिल सका।यह मामला दिखाता है कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक कैसे न्याय व्यवस्था में सहायक हो सकती है और झूठे आरोपियों का पर्दाफाश कर सकती है।