उत्तर प्रदेश

अयोध्या में धूमधाम से संपन्न हुई आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में गंगा दशहरा पर हुआ पावन समारोह

अयोध्या:  गंगा दशहरा के पावन अवसर पर अयोध्या की पावन भूमि पर आज एक और स्वर्णिम इतिहास रचा गया।  राम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर राजाराम समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री की अयोध्या यात्रा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पावन कार्यक्रम में सहभागिता के लिए विशेष रूप से अयोध्या पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर रामकथा पार्क में उतरा, जहां प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही और अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनकी गर्मजोशी से स्वागत की।

धार्मिक अनुष्ठान का क्रम

मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया और तत्पश्चात रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। वहां उन्होंने आरती में सहभागिता की और फिर राम मंदिर के प्रथम तल पर आयोजित प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पूर्ण श्रद्धा के साथ भाग लिया।

मुख्यमंत्री के विशेष संदेश

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण और पावन है। गंगा दशहरा की यह पवित्र तिथि है, जब मां गंगा का अवतरण इस धरा पर हुआ था। महाराज भगीरथ के बाद प्रधानमंत्री मोदी जी ने नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से अविरल और निर्मल गंगा का स्वप्न साकार किया है, जिसके लिए हम उनके कृतज्ञ हैं।”

पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो 15 अगस्त तक निरंतर चलेगा। इस कार्यक्रम का भव्य रूप 23 जून को देखने को मिलेगा।

सामाजिक मीडिया पर संदेश

मुख्यमंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “प्रभु श्रीराम की पावन जन्मभूमि अयोध्या धाम में आज श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर श्री राम दरबार सहित अष्ट देवालयों में पवित्र देव विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा हेतु आयोजित कार्यक्रम का साक्षी बनने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ है। यह पावन अवसर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की नूतन अभिव्यक्ति है।”

धार्मिक उत्साह का माहौल

पूरे कार्यक्रम के दौरान ‘जय श्रीराम’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। भक्तजनों में अपार उत्साह देखने को मिला और यह समारोह अयोध्या के इतिहास में एक और स्वर्णाक्षरों में लिखा गया अध्याय बन गया।

 

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