
जौनसार-बावर क्षेत्र में परंपरागत पौष पर्व और माघ मरोज लोक उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी 9 जनवरी से इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लोक पर्व का विधिवत शुभारंभ होगा। क्षेत्र में उत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है और गांव-गांव में इसकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
पौष पर्व की शुरुआत हनोल के समीप स्थित कयलू महाराज मंदिर में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ होगी। परंपरा के अनुसार चुराच की रस्म के बाद 10 जनवरी को किसराट पर्व मनाया जाएगा। यह लोक उत्सव लगभग एक माह तक चलेगा, जिसमें क्षेत्र के लोग और बाहर से आने वाले अतिथि भाग लेंगे।
माघ मरोज पर्व को लेकर जौनसार-बावर में विशेष रौनक देखने को मिलती है। लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बकरों की खरीदारी करते हैं और घरों में विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इस दौरान रिश्तेदारों और मेहमानों के स्वागत-सत्कार की परंपरा निभाई जाती है, जो इस पर्व की खास पहचान है।
मान्यता है कि यह पर्व महासू देवता द्वारा किरमिर राक्षस के वध की खुशी में मनाया जाता है। इसी कारण इसे विजय, उत्सव और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। माघ मरोज केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को संजोने वाला पर्व है।
पौष पर्व और माघ मरोज के दौरान पारंपरिक लोकगीत, नृत्य और सामूहिक आयोजन जौनसार-बावर की समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत कर देते हैं। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।