मंदाकिनी के अस्तित्व पर संकट: क्या हम एक और आपदा को न्योता दे रहे हैं?

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से आई तस्वीरें विचलित करने वाली हैं।
अगस्त्यमुनि-विजयनगर क्षेत्र में, पेट्रोल पंप के ठीक समीप, मंदाकिनी नदी के शांत प्रवाह के बीच मशीनों का शोर और अवैध खनन का खेल बेखौफ जारी है। यह केवल बालू और पत्थरों का दोहन नहीं है, बल्कि उस संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ खिलवाड़ है, जिसने अतीत में कई जख्म झेले हैं।
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पर्यावरणविदों की गंभीर चेतावनी: “नदी के तंत्र से छेड़छाड़ आत्मघाती”
मंदाकिनी की इस दुर्दशा पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद जगत सिंह ‘जंगली’ ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मंदाकिनी का अस्तित्व आज खतरे में है।
”अतीत में अवैध खनन के कारण ही उत्तराखंड की नदियों के तटों पर आपदाओं का तांडव बढ़ा है। अगस्त्यमुनि की वर्तमान स्थिति उसी विनाशकारी दिशा की ओर संकेत कर रही है।”
— जगत सिंह ‘जंगली’
वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेंद्र बदरी ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा है कि नदी तंत्र के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ सीधे तौर पर प्राकृतिक आपदा को खुला निमंत्रण देना है।
क्या है जमीनी हकीकत?
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि खनन का यह खेल नियमों की धज्जियां उड़ाकर खेला जा रहा है:
मानकों का उल्लंघन: निर्धारित लंबाई-चौड़ाई की सीमा से कहीं अधिक गहराई तक खुदाई की जा रही है।
मशीनों का तांडव: पट्टा क्षेत्र के बाहर भारी मशीनों के जरिए दिन-रात बालू और बजरी निकाली जा रही है।
खतरे में बुनियादी ढांचा: अनियंत्रित खनन से भविष्य में भू-कटाव, पुलों को क्षति और राष्ट्रीय राजमार्ग के ध्वस्त होने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
प्रशासन की ‘जांच’ पर उठते सवाल
जब इस संवेदनशील मामले पर रूद्रप्रयाग के उप निदेशक (खान) वीरेंद्र कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि शिकायतों के आधार पर ‘जांच कराई जाएगी’। लेकिन स्थानीय निवासियों का गुस्सा इसी बात पर है।
जनता का सवाल: “जब दिन के उजाले में बड़ी-बड़ी मशीनें नदी का सीना चीर रही हैं और डंपरों की कतारें गवाही दे रही हैं, तो फिर किस अदृश्य सबूत की जांच का इंतजार किया जा रहा है?”