लोहाघाट विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला रखा सुरक्षित
हलफनामे में तथ्य छिपाने के आरोपों पर दोनों पक्षों की अंतिम बहस के बाद अदालत ने सुरक्षित रखा निर्णय

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय में लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र से विधायक के चुनाव की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई संपन्न हो गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों और सबूतों को रिकॉर्ड पर लेने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह मामला वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है, जिसमें पराजित प्रत्याशी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्वाचित विधायक के खिलाफ चुनाव याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि संबंधित विधायक ए-श्रेणी के ठेकेदार रहे हैं, लेकिन उन्होंने नामांकन के समय अपने शपथ पत्र में इस बात का स्पष्ट खुलासा नहीं किया। इसके साथ ही, हलफनामे में स्वयं और अपने परिवार की वास्तविक आय की जानकारी भी छिपाने का दावा किया गया था।
दूसरी ओर, विधायक पक्ष ने अदालत में इन सभी आरोपों का खंडन करते हुए याचिका को बेबुनियाद बताया। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया से पूर्व ही ठेकेदारी से नियमानुसार इस्तीफा दे दिया गया था, इसलिए किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने का प्रश्न ही नहीं उठता। इसके साथ ही याचिका की पोषणीयता (मांटेनेबिलिटी) पर भी सवाल उठाए गए।
अदालत की पीठ ने मामले से जुड़ी सभी दलीलों और तर्कों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है, जिस पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है।