देवप्रयाग/श्रीनगर: पहाड़ का ‘बीमार’ सिस्टम; अस्पताल में खड़ी रही एंबुलेंस, ‘स्टेयरिंग खराब’ का बहाना सुन तड़पकर मर गई गर्भवती और उसका बच्चा.

श्रीनगर/देवप्रयाग (30 जनवरी 2026): उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की एक बार फिर पोल खुल गई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में काम करने वाले एक कर्मचारी की गर्भवती पत्नी और उसके अजन्मे बच्चे की जान सिर्फ इसलिए चली गई, क्योंकि वक्त पर एंबुलेंस नहीं मिली। विडंबना देखिए कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस खड़ी थी, लेकिन ‘ड्राइवर छुट्टी पर है’ और ‘गाड़ी का स्टेयरिंग खराब है’ जैसे बहाने बनाकर मरीज को ले जाने से मना कर दिया गया।
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रेल परियोजना में कार्यरत यूपी निवासी विनोद अपनी पत्नी शिखा (31) के साथ देवप्रयाग में अस्थायी रूप से रहते थे। शिखा 32 सप्ताह की गर्भवती थीं। बुधवार शाम का हादसा: शिखा खाना बना रही थीं, तभी सीढ़ियों से गिरने के कारण उन्हें ब्लीडिंग शुरू हो गई। उनकी चीख सुनकर पड़ोसी दुकानदार शीशपाल भंडारी मौके पर पहुंचे और अपनी निजी गाड़ी से उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बागी ले गए। अस्पताल की संवेदनहीनता बागी अस्पताल पहुंचने तक शिखा होश में थीं। डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उन्हें हायर सेंटर श्रीनगर रेफर कर दिया। खड़ी एंबुलेंस, कोहरे बहाने: अस्पताल के बाहर सरकारी एंबुलेंस खड़ी थी। जब उसे ले जाने की बात हुई, तो प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। तर्क दिया गया कि “चालक छुट्टी पर है और गाड़ी का स्टेयरिंग खराब है।” पड़ोसी शीशपाल ने पेशकश की कि वे खुद एंबुलेंस चलाकर ले जाएंगे, लेकिन नियमों का हवाला देकर उन्हें मना कर दिया गया।
रास्ते में तोड़ा दम करीब दो घंटे तक गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही। रात 9 बजे जब 108 एंबुलेंस पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में ही जच्चा और बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।
अधिकारी की सफाई CHC बागी की प्रभारी डॉ. अंजना गुप्ता ने बताया कि महिला को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। उन्होंने महिला को स्थिर करने की कोशिश की और 108 को फोन किया था। उन्होंने पुष्टि की कि अस्पताल की एंबुलेंस का चालक छुट्टी पर था।