ग्रामीण सड़कों की स्थिति सुधारने को लेकर डीएम के सख्त निर्देश
बारिश से क्षतिग्रस्त मार्गों की तत्काल बहाली का आदेश, सेब की फसल को ध्यान में रखते हुए कनेक्टिविटी बनाए रखने पर जोर

उत्तरकाशी: जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने सोमवार देर शाम आपदा कंट्रोल रूम से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा बैठक में वर्षा से क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की तत्काल बहाली के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद की पीएमजीएसवाई योजना के तहत बारिश से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिए कि मार्गों की बहाली का कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डीएम आर्य ने बैठक में निर्माणाधीन सड़क परियोजनाओं की प्रगति, उनकी गुणवत्ता और समय सीमा की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा और निर्माण कार्य में किसी भी तरह की शिथिलता स्वीकार्य नहीं है।
जिलाधिकारी ने कहा, “ग्रामीण सड़कों का निर्माण केवल एक विकास परियोजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनजीवन स्तर को सुधारने का महत्वपूर्ण साधन है। इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी सड़कें उच्चतम गुणवत्ता मानकों के अनुसार निर्मित हों और उनका उचित रखरखाव भी हो।”
मौसम की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस समय पर, जब सेब की फसल का सीजन चल रहा है, जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को सुचारू बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने मोरी क्षेत्र के भीतरी, दोणी जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में मार्गों पर आवाजाही बहाल रखने के लिए पर्याप्त मशीनों और आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में एडीएम मुक्ता मिश्र और डीडीएमओ शार्दूल गुसाई की उपस्थिति के साथ-साथ पीएमजीएसवाई उत्तरकाशी, चिन्यालीसौड़, पुरोला, ब्रिडकुल और वाप्कोस मोरी के अधिशासी अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक के दौरान पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बारिश से बाधित मार्गों की वर्तमान स्थिति और चल रही परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
जिलाधिकारी के इन निर्देशों के बाद अब सभी संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करें। विशेष रूप से वे मार्ग जो ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय और बाजारों से जोड़ते हैं, उनकी बहाली को प्राथमिकता दी जानी है।