
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने एक बार फिर राज्य के स्थानीय उत्पादों, खासकर माल्टा के दामों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक फल औषधीय गुणों से भरपूर हैं, लेकिन किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर उन्होंने धामी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार की प्रतिज्ञा को तोड़ने का काम कांग्रेस को ही करना पड़ेगा।
हरीश रावत लंबे समय से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं। जब भी अवसर मिलता है, वह काफल, माल्टा, नींबू और अन्य पहाड़ी उत्पादों के जरिए लोगों को इनके लाभों से अवगत कराते हैं। कई मौकों पर उनके आयोजनों में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के नेता भी शामिल होते रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के फल केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अब बाहरी कंपनियां भी माल्टा के छिलके खरीदने के लिए उत्तराखंड पहुंच रही हैं। माल्टा, नारंगी, नींबू और गलगल के छिलकों का उपयोग दवाइयों और विभिन्न उपचारों में किया जाता है, जिससे इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
हरीश रावत ने सवाल उठाया कि जब इन फलों की इतनी उपयोगिता और बाजार में मांग है, तो किसानों को इसका सही लाभ क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से स्थानीय किसानों के हित में ठोस नीति बनाने की मांग की और कहा कि यदि सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस किसानों की आवाज बनकर संघर्ष करेगी।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य में स्थानीय उत्पादों के विपणन और मूल्य निर्धारण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। राजनीतिक गलियारों में भी उनके इस बयान को सरकार पर सीधा हमला माना जा रहा है।