देहरादून

तिरुपति लड्डू प्रसादम विवाद: रुड़की की भोले बाबा डेयरी को एसआईटी से मिली क्लीन चिट

देहरादून: तिरुपति लड्डू प्रसादम के विवादित मामले में रुड़की स्थित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में कंपनी द्वारा आपूर्तित घी में एनिमल फैट (पशु चर्बी) का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। यह निष्कर्ष अदालती कार्यवाही में प्रस्तुत किया गया है।

तिरुपति लड्डू

न्यायालयीन हस्तक्षेप और निगरानी

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति हरिनाथ एन. ने 10 जुलाई को याचिकाकर्ता कडुरु चिन्नप्पन्ना की याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच की प्रत्यक्ष निगरानी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक को सौंप दी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि जांच को दिशाहीन बनाया जा रहा है और एक अनधिकृत पुलिस अधिकारी गवाहों को मिथ्या बयान देने के लिए दबाव डाल रहा था।

विवाद की उत्पत्ति

यह संपूर्ण मामला तब शुरू हुआ जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में तिरुपति मंदिर के लड्डू निर्माण में पशु चर्बी युक्त घी का प्रयोग किया गया था। इस कथन से देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ।

एसआईटी का गठन और संरचना

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अक्टूबर में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। इस दल में केंद्रीय जांच ब्यूरो के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश पुलिस के दो प्रतिनिधि तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का एक अधिकारी शामिल है।

साजिश का शिकार बनी कंपनियां

इस विवाद में तमिलनाडु की एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड सहित रुड़की की भोले बाबा डेयरी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को अनावश्यक रूप से घसीटा गया। कंपनियों ने इन आरोपों को पूर्णतः निराधार बताते हुए इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया था।

जांच की खामियां उजागर

एनडीडीबी कैल्फ लैब की रिपोर्ट के अनुसार नमूना संग्रह उचित प्रक्रिया के अनुसार नहीं किया गया था, जिससे प्रारंभिक रिपोर्ट कानूनी रूप से अमान्य साबित हुई। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी जांच अधिकारी को इस कार्य हेतु अनधिकृत पाया। उल्लेखनीय है कि भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी का कोई भी उत्पाद एफएसएसएआई की जांच में कभी असफल नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को स्पष्ट रूप से कहा कि वाईएसआरसीपी के कार्यकाल के दौरान लड्डू में पशु वसा मिलाए जाने का कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा बिना ठोस साक्ष्य के सार्वजनिक बयानबाजी पर भी प्रश्न उठाया था। अदालत ने टिप्पणी की, “लैब रिपोर्ट में अस्पष्टताएं हैं… यदि आपने स्वयं जांच का आदेश दिया था, तो मीडिया में बयान देने की आवश्यकता क्या थी?”

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की अब तक की समस्त जांचों में भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क प्राइवेट लिमिटेड का कोई भी नमूना अनुत्तीर्ण नहीं हुआ है। यह उपलब्धि कंपनी की गुणवत्ता के प्रति अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोले बाबा कंपनी के स्वामी को रिहा कर दिया है, जो कंपनी की निर्दोषता का स्पष्ट संकेत है। यह निर्णय न केवल कंपनी के लिए बल्कि संपूर्ण डेयरी उद्योग के लिए न्याय की जीत है।इस प्रकार एसआईटी की जांच ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रारंभिक आरोप जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त आधार के लगाए गए थे, जिससे निर्दोष कंपनियों की प्रतिष्ठा को अनावश्यक नुकसान हुआ।

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