उत्तराखंडसामाजिक

धारा 161 का सहारा लेकर सरकारी ज़मीनों को खुर्द बुर्द करने का लगाया आरोप

उत्तराखंड

उत्तराखण्ड में संगठनात्मक रूप से गिरोह बनाकर कानून का सहारा लेकर सरकारी विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की भूमाफियाओं के साथ सांठगांठ करने एवं शासन को कूटरचित रिपोर्ट प्रेषित करने के कई प्रकरण सामने पूर्व में आ चुके है। वर्तमान में प्रकरण एन.एच.72 से लगी सरकार की बेशकीमती भूमि जिसे हल्का पटवारी एवं प्रधान के साथ अन्यों के द्वारा की गई कूटरचना से शासन तंत्र को गुमराह कर झूठे तथ्य एवं रिपोर्ट प्रेषित कर सरकारी जमीन को खुर्दबुद किये जाने का प्रकरण आपके सम्मुख रखा जा रहा है।

मेरे द्वारा इसी प्रकार के एक प्रकरण में एक शिकायत की गई थी जिसमें इन्दर सिंह खत्री एवं ग्राम सभा पंचायत माजरी ग्रान्ट, विकास खण्ड डोईवाला के तत्कालीन एवं वर्तमान प्रधान एक प्रस्ताव के माध्यम से सरकारी जमीन जो एन.एच. -72 से लगी हुई है भूमि जिसका खाता सं० 124 खसरा सं० 288ग में रकबा 0.9830 है० है, को  इन्दर सिंह खत्री को देने की योजना कूटरचित दस्तावेज एवं षडयंत्र के आधार पर एक गठजोड़ बनाते हुए हल्का पटवारी एवं अन्य विभागीय एवं अन्यों के द्वारा बनाई गई जिस पर अमल करने हेतु एन.एच.-72 से लगी हुई भूमि पर पटवारी द्वारा रिपोर्ट लगायी गई कि इस भूमि पर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। इसलिए इस भूमि को इन्दर सिंह खत्री की माजरी ग्रान्ट के रास्ते वाली नदी श्रेणी की भूमि जिस पर वर्तमान में अवैध कब्जे है और जांच के दौरान मौका स्थल पर जांच अधिकारी तत्कालीन ए.डी. एम. प्रशासन एवं एस.डी., डोईवाला को मौके पर सरकार को विनियमित की गई भूमि प्राप्त नहीं हुई और वर्तमान समय में ग्राम प्रधान द्वारा नदी श्रेणी की भूमि पर सरकारी धन का दुरूप्रयोग करते हुए नदी श्रेणी की भूमि को सरकार के लिए विनियमित की गई भूमि दर्शायी जा रही है एवं अन्यों का कब्जा होने के कारण भूमि का वास्तविक चिहिन्तकरण नहीं किया गया परिणाम स्वरूप उक्त बेशकीमती भूमि जो सरकार की थी को धारा-161 के तहत इन्दर सिंह खत्री के नाम विनिमिय किया गया।

उपरोक्त प्रकरण में प्रथम दृष्टया हल्का पटवारी दोषी है क्योंकि उसके द्वारा अपनी रिपोर्ट में एक तरफ का जानबूझकर इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया कि एन.एच.-72 से लगी हुई भूमि सरकार की है और दूसरी तरफ यह गलत तथ्य दर्शाया गया कि उक्त भूमि पर जाने का कोई रास्ता नहीं है इस प्रकार शासन को स्पष्टतौर पर गुमराह किया गया और उसी आधार पर शासन से स्वीकृत ले लेने के पश्चात उप जिलाधिकारी से भूमि का हस्तान्तरण भी करवा लिया गया।

विभिन्न माध्यमों से की गई शिकायत के क्रम में सी.एम. हैल्पलाईन एवं जिलाधि ाकारी, देहरादून के कार्यालय में दर्ज शिकायत दि० 31.1.22 पर तत्कालीन हल्का पटवारी द्वारा सरकारी भूमि को कब्ज़ा मुक्त करने की कार्यवाही करने के बजाय कब्जाधारियों से मात्र वार्ता करने की रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। दूसरी रिपोर्ट में भूमि के एन.एच. 72 से लगी भूमि होने के तथ्य को छिपाते हुए शासन को गुमराह करनी की योजना बनाई गई क्योंकि इन्दर सिंह खत्री पुत्र मंगल सिंह एक प्रभावशाली भूव्यवसायी एवं व्यापारी होने के कारण पटवारी की रिपोर्ट पर आंख मूंद कर एक राय होते हुए रिपोर्ट को गुमराह करने के उद्देश्य से लगातार शासन स्तर तक पहुंचाते रहें जिसमें स्वयं तत्कालीन तहसीलदार एवं अन्य के द्वारा भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया गया और मौका स्थल का मुआयना नहीं किया गया क्योंकि जिस पटवारी द्वारा इन्दर सिंह खत्री की एक चक की भूमि दर्शाया गया था वह वास्तव में आजतक भी मौका स्थल पर उपलब्ध नहीं है और उक्त शिकायत की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरान्त कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अनाप-शनाप में नदी श्रेणी की भूमि की तारबाड एव बाउन्ड्रीवाल कराकर दोबारा गलत तथ्यों के साथ दर्शाया जा रहा है।

मेरे द्वारा इस प्रकरण में लगातार पत्राचार इस आशय से किया जा रहा है कि सरकार में बैठे हुए जिम्मेदार अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ ग्राम प्रधान एवं लाभार्थी इन्दर सिंह खत्री जिसके गठजोड़ के कारण तत्कालीन पटवारी एवं ग्राम प्रधान ने सांठगांठ एवं कूटरचित दस्तावेजी रिपोर्ट शासन को गुमराह करते हुए प्रेषित की गई जिसमें जिलाधिकारी द्वारा करायी गई। इस प्रकरण पर की गई जांच की रिपोर्ट श्रीमान अपर जिलाधिकारी, प्रशासन एवं श्रीमान शासकीय अधिवक्ता देहरादून द्वारा प्रेषित की गई जो क्रमश: 27.5.2023 एवं 20.7. 2023 को जिलाधिकारी देहरादून को प्राप्त हो चुकी है जिस पर विधिक कार्यवाही/प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करने हेतु प्रार्थी द्वारा आप महोदया को 8.12.2023 को पत्र प्रेषित किया गया था जिस पर जिलाधिकारी द्वारा अभी तक सम्बन्धित दोषी राजस्व कर्मचारियों एवं अधिकारियों के साथ-साथ ग्राम प्रधान एवं इन्दर सिंह खत्री के विरूद्ध प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी गई और जिलाधिकारी स्तर पर दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जो राज्य के राजस्व हित में नहीं है। अधिकारियों के स्तर से इस प्रकार की लापरवाही से भूमाफियाओं को संरक्षण प्राप्त होता है।

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