चौंकाने वाला खुलासा: भारत में 50% वाहन बिना बीमा के चल रहे, कई राज्यों में पीयूसीसी अनुपालन 30% से भी कम

नई दिल्ली: देश में वाहन मालिकों की जिम्मेदारी को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कार्स24 की ओर से जारी डेटा स्टडी ने भारत में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण नियमों के अनुपालन की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 50 प्रतिशत से अधिक वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे सड़क सुरक्षा और कानूनी अनुपालन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दोपहिया वाहनों में सबसे ज्यादा उल्लंघन
अध्ययन से पता चला है कि बिना बीमा चलने वाले वाहनों में सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि दोपहिया वाहन चालक सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं। बीमा की अनुपस्थिता का मतलब है कि दुर्घटना की स्थिति में न तो चालक और न ही पीड़ित को उचित मुआवजा मिल सकता है।
प्रदूषण प्रमाण पत्र की गंभीर स्थिति
रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) के अनुपालन की स्थिति और भी चिंताजनक है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों में पीयूसीसी अनुपालन दर 30 प्रतिशत से भी कम है। यह आंकड़ा विशेष रूप से दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों के लिए गंभीर चिंता का विषय है, जहां वायु प्रदूषण पहले से ही एक बड़ी समस्या है।
अध्ययन में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच अनुपालन दर में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया है। दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे आंध्र प्रदेश और केरल में स्थिति थोड़ी बेहतर है, जहां पीयूसीसी और बीमा नियमों के अनुपालन की औसत दर लगभग 9.6 प्रतिशत है। वहीं, उत्तर भारत में यह दर मात्र 5.6 प्रतिशत है, जो अत्यधिक चिंताजनक है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में मुख्य समस्या एक्सपायर्ड इंश्योरेंस की है। लोग बीमा तो करवाते हैं लेकिन उसका नवीनीकरण नहीं करवाते। वहीं, दक्षिण भारत में पीयूसीसी का न होना अधिक देखने को मिल रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती है।
कानूनी और सामाजिक चुनौतियां
यह स्थिति न केवल कानूनी उल्लंघन है बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रश्न है। बिना बीमा के वाहन चलाना दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजे से वंचित करता है। वहीं, पीयूसीसी की अनुपस्थिति पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ाती है और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालती है।
आवश्यक सुधार की मांग
इस रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञों ने सख्त नियमों के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही सुझाव दिया है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग करके वाहन बीमा और पीयूसीसी की स्थिति की निगरानी को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि देश में वाहनों की संख्या तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कानूनी और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का निर्वहन उसी अनुपात में नहीं हो रहा।