वाराणसी: गंगा खतरे के निशान से 57 सेमी ऊपर, पहली बार नमो घाट बंद

वाराणसी: धार्मिक नगरी वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। रविवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 57 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, जिससे शहर के कई प्रमुख घाटों पर पानी भर गया है। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से बने नमो घाट को पूरी तरह से बंद कर दिया है। घाट पर निर्मित आकर्षक नमस्ते संरचना अब पूरी तरह से डूबने की कगार पर है, जिसके कारण पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह पहली बार है जब नमो घाट पर इतना अधिक बाढ़ का पानी आया है।
बढ़ते जलस्तर का प्रभाव शहर के अन्य महत्वपूर्ण घाटों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। शीतला घाट की सड़क तक गंगा का पानी पहुंच गया है, जबकि अस्सी घाट की सड़कों पर व्यापक जलभराव हो गया है। सामने घाट की सड़क पर भी बाढ़ का पानी आ गया है, जिससे यहां की दैनिक गतिविधियां बाधित हो गई हैं। मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार के लिए शवों की लंबी कतार लगी है क्योंकि बाढ़ के कारण दाह संस्कार की प्रक्रिया में बाधा आ रही है। विशेष चिंता की बात यह है कि बाढ़ का पानी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ट्रॉमा सेंटर से महज 800 मीटर की दूरी पर पहुंच गया है, जो एक गंभीर स्थिति का संकेत है।
काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है क्योंकि गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। शाम तक गंगा द्वार की केवल 13 सीढ़ियां ही पानी से बची थीं। विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का अनुमान है कि अगर जलस्तर बढ़ने का यही सिलsila जारी रहा तो सोमवार तक गंगा द्वार की कुछ और सीढ़ियां डूब सकती हैं। यह स्थिति न केवल धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित कर रही है बल्कि हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी समस्या बन गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घाटों के पास जाने से बचें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।