उत्तराखंड में 15 साल से रहने वालों को मिलेगी राहतः
आज CM धामी करेंगे देवभूमि पोर्टल का शुभारंभ; हर परिवार को मिलेगी अलग पहचान, एक आईडी में जुड़ेगा पूरा रिकॉर्ड
“उत्तराखंड में अब सिर्फ मूल निवासी ही नहीं, बल्कि पिछले 15 साल से राज्य में रह रहे नागरिकों को भी देवभूमि परिवाउर आईडी मिल सकेगी। तत्कालीन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद देवभूमि परिवार अधिनियम 2026 लागू हो गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही राज्य के हर परिवार का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। परिवार के प्रत्येक सदस्य की जानकारी एक ही आईडी से जुड़ी होगी।”
सरकार का दावा है कि इससे सरकारी योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने, पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और विभागों के बीच डेटा साझा करने में आसानी होगी। हालांकि, इस व्यवस्था में दर्ज नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती होगी। डेटा में सेंधमारी करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।”
“देवभूमि परिवार आईडी की सबसे अहम बात यह है कि इसका दायरा केवल राज्य के मूल निवासियों तक सीमित नहीं रखा गया है। उत्तराखंड में 15 साल से रह रहे नागरिक भी इस व्यवस्था के तहत पंजीकरण करा सकेंगे। यानी लंबे समय से राज्य में रह रहे ऐसे परिवार, जो यहां की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, उन्हें भी इस डिजिटल पहचान से जोड़ा जाएगा।”
“सरकार इस व्यवस्था के जरिए राज्य में रहने वाले परिवारों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना चाहती है। इससे परिवार के सदस्यों की पहचान, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभों का विवरण एक जगह उपलब्ध होगा।”
“देवभूमि परिवार आईडी के तहत प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट पहचान संख्या जारी की जाएगी। यह संख्या परिवार की डिजिटल पहचान के रूप में काम करेगी। इसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज किया जाएगा। इस डेटाबेस में नाम, आयु, आधार से जुड़ी जानकारी, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा और रोजगार जैसी जानकारियां शामिल होंगी। परिवार के सदस्यों से जुड़ा यह रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल डेटाबेस में सुरक्षित रखा जाएगा।”
“इसका फायदा यह होगा कि किसी सरकारी योजना के लिए आवेदन करते समय परिवार को बार-बार अपनी वही जानकारियां अलग-अलग विभागों में देने और सत्यापन कराने की जरूरत कम होगी। विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पात्रता का सत्यापन कर सकेंगे।”