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पिथौरागढ़ में धधक रहे जंगल, वन्यजीवों पर मंडराया खतरा

पिथौरागढ़ और बागेश्वर के जंगल पिछले कई दिन से धधक रहे हैं, वनाग्नि सीजन से पहले की गई मॉक ड्रिल नहीं आ रही है काम।

गर्मियां बढ़ते ही प्रदेश के जंगल एक बार फिर से धधक उठे हैं. आग की इतनी तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रही है कि जंगल के आसपास रहने वाले लोग दहशत में हैं. अस्कोट का कस्तूरी मृग अभयारण्य भी वनाग्नि की चपेट में है. हर साल जंगलों की आग गर्मियों में आपदा जैसे हालात पैदा कर देती है. इससे बड़े-बड़े जंगल तो तबाह होते ही हैं, साथ ही इन वनों में मौजूद वनस्पतियां भी प्रभावित होती हैं. .गर्मियां शुरू होते ही पिथौरागढ़ समेत जिले के अधिकांश जंगलों में आग लगने की घटनाओं मैं तेजी से बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है.

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय सहित आसपास के क्षेत्र के जंगलों में पिछले एक सप्ताह से आग लगी हुई है. आग से जंगल जलकर खाक हो गए हैं. बेरीनाग, गंगोलीहाट, गणाई, थल, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला सहित बागेश्वर जनपद के धरमघर, कपकोट, कांडा और गरुड़ क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों भीषण आग लगी है. इससे अमूल्य वन संपदा जलकर खाक हो रही है. वहीं दूसरी ओर वायुमंडल और इंसानों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है. जंगल आग उगल रहे हैं. वनाग्नि के कारण चारों तरफ धुआं छाया हुआ है. जंगलों की लगी आग का धुला नगरों तक फैल चुका है. इन हालात ने वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को चिंता में डाल दिया है.

वनाग्नि को बुझाने के लिए पूर्व में की गई तैयारी और माॅक ड्रिल पर पर कितनी सच्चाई है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर जंगल जल रहे थे. कुछ स्थानों पर वन विभाग कर्मी पुराने आग बुझाने के तरीके से आग बुझा रहे थे. अन्य कई जगह आग बुझाता हुआ कोई नहीं दिखाई दे रहा था.

जंगलों से निकल रहा जानलेवा धुआं:

15 फरवरी से 15 जून तक का फायर सीजन प्रदेश के जंगलों के लिए बेहद संवेदनशील होता है. शीतकाल में यदि अच्छी वर्षा और बर्फबारी हो जाए, तो जंगलों में आग लगने की अवधि पीछे खिसक जाती है. मगर इस वर्ष अन्य वर्षों की अपेक्षा बर्फबारी की बेरुखी के परिणाम गर्मी के मौसम के शुरुआत में ही नजर आने लगे हैं. अप्रैल में ही अनियंत्रित रूप से सामने आ रही वनाग्नि की घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है. इससे पहाड़ों पर चारों और धुआं छाया हुआ है. जंगलों में लगी आग जहां एक तरफ वायुमंडल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है, तो वहीं इंसानों के स्वास्थ्य के लिए इसका धुआं बेहद खतरनाक साबित हो रहा है. बेरीनाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉक्टर सिद्धार्थ पाटनी ने बताया कि-

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