उत्तरकाशी

Uttarkashi:धराली आपदा में बिखरे परिवार, पिता की लापता बेटे की तलाश जारी

Uttarkashi: धराली में आई भयंकर आपदा ने न जाने कितने परिवारों को तोड़कर रख दिया है। अपनों के लौटने की आस में बैठे परिवार आज भी उम्मीद की एक किरण का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे ही एक पिता हैं बिजनौर के लेखराज, जो अपने 18 वर्षीय बेटे योगेश को ढूंढने के लिए पिछले पांच दिनों से दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। हर दरवाजे पर जाकर अपने बेटे का हाल-चाल पूछ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।

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बिजनौर के गजरौला चांदपुर निवासी लेखराज का बेटा योगेश मजदूरी करने के लिए धराली आया था। पिता बताते हैं कि 3 अगस्त को उनसे आखिरी बार बात हुई थी, तब योगेश ने कहा था कि रक्षाबंधन के लिए घर आएगा, लेकिन ठेकेदारों ने अभी तक पैसा नहीं दिया था। उसके बाद से उसका कोई संपर्क नहीं हो पाया है। घर पर बहन अपने भाई के इंतजार में बैठी रह गई और जब वह रक्षाबंधन पर भी नहीं आया तो लेखराज 8 अगस्त को खुद उत्तरकाशी पहुंच गए।

लेखराज ने बताया कि पहले वे उत्तरकाशी के मातली हेलिपैड पर गए जहां वे अपने बेटे की जानकारी लेते रहे। दो दिन बाद हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से वे हर्षिल तक पहुंचने में कामयाब हुए, लेकिन वहां भी योगेश के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। अब वे कभी पुलिस थाने के चक्कर काट रहे हैं तो कभी मोबाइल नेटवर्क के कर्मचारियों से मिल रहे हैं, इस उम्मीद में कि शायद उनके बेटे की मोबाइल लोकेशन का कुछ पता चल जाए।

योगेश दो ठेकेदारों के साथ धराली में काम करने आया था। आपदा से पहले तक वह अपने परिवार से नियमित संपर्क में था और रक्षाबंधन पर घर आने की योजना बना रहा था। लेकिन 5 अगस्त को आई इस भयानक आपदा ने सब कुछ बदल दिया। अब लेखराज हर उस जगह जा रहे हैं जहां उन्हें लगता है कि उनके बेटे की कोई खबर मिल सकती है।

यह केवल लेखराज परिवार की कहानी नहीं है। धराली आपदा में ऐसे दर्जनों परिवार हैं जो अपने प्रियजनों का इंतजार कर रहे हैं। कुछ परिवार तो पूरी तरह से बिखर गए हैं और कुछ में एक-दो सदस्य लापता हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन हर गुजरता दिन परिवारों की चिंता को और बढ़ा रहा है। अधिकारियों से अनुरोध है कि वे लापता व्यक्तियों की सूची तैयार करें और उनकी तलाश को प्राथमिकता दें ताकि लेखराज जैसे माता-पिता को अपने बच्चों से मिलने का मौका मिल सके।

इस आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदाएं न केवल जान-माल का नुकसान करती हैं बल्कि पूरे परिवारों को बिखेर देती हैं और लोगों के दिलों में एक अनंत पीड़ा छोड़ जाती हैं।

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