देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर एक बड़ी पहल की है। आगामी 16 अप्रैल से संसद में प्रस्तावित विशेष सत्र से पूर्व, मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की अपील की है।

लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि आगामी विशेष सत्र देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया (डिसीजन मेकिंग) में शामिल करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि एक समावेशी समाज का सपना तभी साकार हो सकता है जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में हों।
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा:
“आज देश की बेटियां अंतरिक्ष से लेकर खेल जगत और सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्टअप्स तक हर क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी समाज में हो रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।”
2029 के चुनावों को लेकर स्पष्ट दृष्टि
सीएम धामी ने पत्र के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समयसीमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में सभी दलों ने एकजुट होकर इस अधिनियम का समर्थन किया था। अब समय आ गया है कि इसे पूरी भावना के साथ धरातल पर उतारा जाए।
-
लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव दिया है कि 2029 का लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने के बाद ही संपन्न हों।
-
प्रभाव: इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और शासन व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
उत्तराखंड के संदर्भ में विशेष महत्व
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और वहां की ‘मातृशक्ति’ के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य के विकास में महिलाओं की भूमिका आधारशिला रही है।
-
सफल मॉडल: राज्य में पंचायती राज और नगर निकायों में महिला आरक्षण के सफल क्रियान्वयन से सक्षम महिला नेतृत्व की एक नई पीढ़ी तैयार हुई है।
-
भविष्य की राह: यह अधिनियम उन बेटियों के लिए नए द्वार खोलेगा जो राजनीति, शिक्षा और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं।
राजनीतिक दलों से एकजुटता की अपील
लेख के अंत में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का मुद्दा किसी दल या व्यक्ति विशेष का नहीं है, बल्कि यह देश की माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान से जुड़ा है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतभेदों को भुलाकर राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री को अटूट विश्वास है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की उपस्थिति से समाज की वास्तविक समस्याओं को अधिक संवेदनशीलता के साथ संबोधित किया जा सकेगा।