देहरादून में फेल हुए रिमोट और सेंसर, मशक्कत के बाद जला 181 फीट ऊंचा रावण

देहरादून: राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में विजयदशमी के अवसर पर आयोजित दशहरा उत्सव में इस बार 181 फीट ऊंचा रावण आकर्षण का केंद्र रहा। हालांकि, रावण दहन के दौरान तकनीकी खराबी के कारण आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पुतले को जलाने के लिए लगाए गए रिमोट और सेंसर ने ऐन वक्त पर काम नहीं किया। इसके बाद काफी मशक्कत करनी पड़ी और आखिरकार मैन्युअल तरीके से रावण का दहन किया गया।
बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पहली बार 181 फीट ऊंचे रावण का पुतला तैयार किया गया था। इसके अलावा 70-70 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन किया गया। आयोजन को भव्य बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन रिमोट और सेंसर के फेल होने से निर्धारित योजना के मुताबिक रावण दहन नहीं हो सका।
मुख्यमंत्री धामी ने दिया सत्य और धर्म का संदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि जीवन में सत्य, धर्म और नैतिकता के महत्व को भी समझाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण दहन का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर मौजूद अहंकार और बुराइयों को समाप्त करना होना चाहिए। भगवान राम का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से मानवता और सदाचार के रास्ते पर चलने का आह्वान किया।
प्रदेश के मूल स्वरूप को बनाए रखने की बात
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने प्रदेश में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर सरकार की चिंता जताई और लव जिहाद, लैंड जिहाद तथा थूक जिहाद जैसे मुद्दों पर सख्त रुख दोहराया। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और शिक्षा से जुड़े सरकारी फैसलों का भी उल्लेख किया।
गौरतलब है कि बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी वर्ष 1947 से देहरादून में दशहरा उत्सव आयोजित करती आ रही है। इस साल आयोजन का 79वां संस्करण था। तकनीकी दिक्कतों के बावजूद अंततः रावण दहन के साथ कार्यक्रम ने बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया।