
नैनीताल। निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के तहत उत्तराखंड में मतदाता सत्यापन का कार्य तेजी से जारी है। इसी क्रम में नैनीताल से एक रोचक मामला सामने आया है, जहां आम नागरिकों की तरह कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, नैनीताल विधायक सरिता आर्या और शहर के कई अन्य प्रमुख लोगों के आवासों पर भी एसआईआर नोटिस पहुंचे हैं।
जानकारी के अनुसार, विधायक सरिता आर्या के आवास पर पहुंचे नोटिस में उनसे और उनके छोटे बेटे से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत के आवास पर भी मतदाता सत्यापन प्रक्रिया के तहत नोटिस दिया गया। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार बूथ लेवल अधिकारी (BLO) जिलेभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। सत्यापन अभियान सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू किया जा रहा है, चाहे वे आम मतदाता हों या किसी संवैधानिक अथवा प्रशासनिक पद पर कार्यरत व्यक्ति।
नैनीताल के एसडीएम नवाजिश खालिक ने बताया कि एसआईआर अभियान के तहत निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से मतदाताओं की जानकारी एकत्र की जा रही है।
उत्तराखंड में 14 जुलाई से फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 भरने की प्रक्रिया जारी है, जो 13 अगस्त तक चलेगी। इस अवधि में पात्र नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
उत्तराखंड के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार—
- फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाता अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
- फॉर्म-8 से नाम, पता, आयु या अन्य विवरण में संशोधन कराया जा सकता है।
- फॉर्म-7 का उपयोग किसी नाम को हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
19 लाख मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिस
निर्वाचन विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक करीब 19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी न किसी प्रकार की त्रुटि चिन्हित की गई है। ऐसे मतदाताओं को चरणबद्ध तरीके से नोटिस भेजे जा रहे हैं, ताकि वे समय रहते आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने रिकॉर्ड में सुधार करा सकें।
विभाग ने यह भी बताया कि अभी लगभग 5.26 लाख मतदाताओं की मैपिंग शेष है। इन मतदाताओं तक पहुंचने और उनका सत्यापन पूरा करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम प्रकाशित होने वाली मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित हो तथा कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे।