हरिद्वार: अब ‘गंगा म्यूजियम’ में दिखेगा मां गंगा का पौराणिक वैभव.

हरिद्वार (12 फरवरी 2026): धर्मनगरी हरिद्वार आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब वे गंगा के घाटों पर स्नान करने के साथ-साथ मां गंगा के अवतरण और हरिद्वार के पौराणिक इतिहास को सजीव रूप में देख और समझ सकेंगे। नगर निगम की पहल पर शासन ने देवपुरा चौक स्थित बेशकीमती जमीन पर एक भव्य ‘गंगा म्यूजियम’ के निर्माण को मंजूरी दे दी है।

10 करोड़ का बजट, पेयजल निगम करेगा निर्माण मेयर किरण जैसल के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए शासन ने इस प्रोजेक्ट के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी कर दी है।
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एजेंसी: इस परियोजना का निर्माण कार्य पेयजल निगम द्वारा किया जाएगा।
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डेडलाइन: मार्च से काम शुरू कर इसे आगामी कुंभ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
म्यूजियम में क्या होगा खास? यह म्यूजियम तीन मंजिला होगा, जबकि इसके सबसे निचले तल (Basement) पर पर्यटकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी। म्यूजियम में निम्नलिखित पौराणिक प्रसंगों का सजीव चित्रण (Live Portrayal) किया जाएगा:
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गंगा अवतरण व भगीरथ तपस्या: मां गंगा के पृथ्वी पर आने की पूरी गाथा।
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कुंभ मंथन: समुद्र मंथन और कुंभ का इतिहास।
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शिव-सती प्रसंग: दक्ष प्रजापति, देवी सती की कथा और भगवान शिव की लीलाएं।
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सप्त सरोवर: गंगा की सात धाराओं से बने सरोवरों का इतिहास।
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प्रमुख मंदिर व कुंड: चंडी देवी, मनसा देवी, मायादेवी, शीतला माता, सुरेश्वरी देवी, ब्रह्मकुंड और मच्छला कुंड का महत्व।
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इतिहास: कांवड़ यात्रा की शुरुआत और हरकी पैड़ी का विस्तृत वर्णन।
भूमाफिया की नजर से बची जमीन मेयर किरण जैसल ने बताया कि देवपुरा चौक स्थित नगर निगम की इस जमीन पर कई सालों से भूमाफियाओं की नजर थी। अब यहाँ म्यूजियम और पार्किंग बनने से जमीन का सदुपयोग होगा और अतिक्रमण का खतरा टलेगा।
2010 का अधूरा सपना होगा पूरा गौरतलब है कि 2010 के महाकुंभ के दौरान भी तत्कालीन शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने गंगा म्यूजियम की योजना बनाई थी, लेकिन वह धरातल पर नहीं उतर सकी थी। अब 16 साल बाद यह सपना साकार होने जा रहा है। मेयर का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी अपने प्राचीन इतिहास को जानना चाहती है, और यह म्यूजियम उनके लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा।