
देहरादून | मुख्य संवाददाता उत्तराखंड में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की किल्लत दूर करने के लिए सरकार द्वारा जारी की गई नई ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) पहले दिन धरातल पर उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे पाई। सरकार ने प्रदेश भर में प्रतिदिन 2,650 कमर्शियल सिलिंडर डिलीवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन 17 मार्च को महज 879 सिलिंडर ही उपभोक्ताओं तक पहुँच सके। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ही है।
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घरेलू गैस को प्राथमिकता, कमर्शियल पर सख्ती
प्रदेश में हाल के दिनों में उपजे गैस संकट को देखते हुए शासन की पहली प्राथमिकता घरेलू गैस (Domestic Gas) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना रही है। इसी रणनीति के तहत सरकार ने कमर्शियल सिलिंडरों की डिलीवरी पर अस्थायी रोक लगा दी थी। शुरुआती चरण में केवल अस्पतालों, हॉस्टलों और आपातकालीन सेवाओं को ही गैस दी जा रही थी। हालांकि, होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों की बढ़ती दिक्कतों और आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए अब व्यावसायिक श्रेणी के लिए 20 प्रतिशत कोटा तय कर नई गाइडलाइन जारी की गई है।
स्टॉक होने के बावजूद कम रही बुकिंग
हैरानी की बात यह है कि 16 मार्च तक प्रदेश की विभिन्न गैस एजेंसियों के पास 11,490 कमर्शियल सिलिंडरों का स्टॉक मौजूद था। इसके बावजूद 17 मार्च को महज 879 सिलिंडरों की ही डिलीवरी हो सकी। आंकड़ों के अनुसार, शाम तक 19 किलोग्राम वाले 794 सिलिंडर और 47.5 किलोग्राम वाले 85 बड़े सिलिंडरों की आपूर्ति की गई।
खाद्य विभाग के अपर आयुक्त पीएस पांगती के अनुसार, “नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक एजेंसी को उसके कनेक्शनों की संख्या के आधार पर कोटा आवंटित किया जा रहा है। इससे वितरण में पारदर्शिता आएगी और आने वाले दिनों में आपूर्ति सुचारू हो जाएगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है।
किस सेक्टर को कितने सिलिंडर मिलेंगे (प्रतिदिन लक्ष्य)
शासन द्वारा जारी SOP के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए कोटा निर्धारित किया गया है:
सेक्टर दैनिक कोटा (सिलिंडर)
रेस्टोरेंट एवं ढाबा 1000
होटल एवं रिजॉर्ट 750
फार्मास्यूटिकल कंपनियां 190
औद्योगिक कैंटीन 150
सरकारी गेस्ट हाउस 150
पेइंग गेस्ट (छात्र आवास) 150
डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण 130
होम स्टे एवं स्वयं सहायता समूह 130
क्या कहते हैं आंकड़े?
वर्तमान में उत्तराखंड की 311 गैस एजेंसियों के पास कुल 63,054 कमर्शियल कनेक्शन पंजीकृत हैं। अधिकारियों का मानना है कि पहले दिन सिस्टम को पटरी पर लाने में कुछ चुनौतियां आईं, लेकिन जल्द ही होटल, रेस्टोरेंट और होमस्टे संचालकों को उनकी आवश्यकतानुसार गैस उपलब्ध होने लगेगी, जिससे चारधाम यात्रा की तैयारियों को भी बल मिलेगा।