उत्तराखंडदेहरादून

रायपुर थाना में पीआरडी जवान की मौत पर सख्ती, सब इंस्पेक्टर निलंबित.

देहरादून रायपुर थाना क्षेत्र में पीआरडी जवान की संदिग्ध मौत के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र डोबाल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सब इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है। इससे पहले थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन अटैच किया जा चुका है। घटना के बाद से मृतक के परिजन लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई

एसएसपी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 28 मार्च को थाना रायपुर में पीआरडी जवान की आत्महत्या के प्रकरण के दौरान कानून-व्यवस्था ड्यूटी में तैनात उप निरीक्षक कृष्ण कुमार सिंह ने पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया। इस पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

पहले ही चार पुलिसकर्मी हो चुके हैं अटैच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने इससे पूर्व रायपुर थाना के एसएचओ सहित तीन अन्य पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन अटैच कर दिया था। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

क्या है पूरा मामला

पुलिस के अनुसार, 28 मार्च की रात डायल 112 के माध्यम से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति पेट्रोल के पैसे देने से इनकार कर रहा है और खुद को पुलिस अधिकारी बताकर हंगामा कर रहा है। सूचना पर पहुंची रायपुर पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।

बताया जा रहा है कि बाद में उक्त व्यक्ति को लॉकअप में रखा गया, जहां वह बेसुध अवस्था में पाया गया। उसे तुरंत कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

मृतक पीआरडी जवान सुनील रतूड़ी के परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हिरासत में हुई मौत का मामला है। उन्होंने घटना के समय थाना परिसर में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

जांच जारी, बढ़ सकती है कार्रवाई

पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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