उत्तराखंड

बदरीनाथ दान विवाद पर त्रिवेंद्र रावत ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, बोले—दोषी मिले तो हो सख्त कार्रवाई

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बदरीनाथ धाम में कथित दान अनियमितता के मामले को गंभीर बताते हुए भरोसेमंद जांच की आवश्यकता जताई

पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार से भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा अनियमितता के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और पूरे मामले की ऐसी जांच होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

पिछले कुछ दिनों से बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आरोपों के सामने आने के बाद मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। इसी बीच त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

इस दौरान उन्होंने अपने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रस्तावित देवस्थानम बोर्ड का भी जिक्र किया। रावत ने कहा कि भले ही बोर्ड लागू नहीं हो सका, लेकिन उनका आज भी मानना है कि राज्य के प्रमुख मंदिरों के बेहतर और पारदर्शी प्रबंधन के लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत है।

वहीं, कांग्रेस ने मौजूदा जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर सवाल उठ रहे हैं, उनसे जुड़े लोगों को ही जांच समिति में शामिल किया गया है। उनका आरोप है कि ऐसी स्थिति में निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद करना मुश्किल है।

गोदियाल ने मांग की कि मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें। यदि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है तो जांच की निगरानी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश से कराई जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आम जनता का भरोसा बना रहे।

कांग्रेस का यह भी आरोप है कि सरकार के पास निष्पक्ष कार्रवाई का अवसर था, लेकिन अब तक उठाए गए कदमों से उसकी मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह केवल स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच को ही स्वीकार करेगी

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